- बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का तबादला, डिजिटल सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की होगी समीक्षा
नई दिल्ली : देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बोर्ड के शीर्ष स्तर पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। इसके साथ ही ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। शिक्षा जगत में इस घटनाक्रम को हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल प्रतियां देखने में कठिनाइयों की शिकायत दर्ज कराई। कुछ छात्रों का कहना था कि उन्हें उपलब्ध कराई गई कॉपियों के कई हिस्से स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे, जबकि कुछ ने दावा किया कि उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने अधूरे या अनुपलब्ध थे। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल और अन्य डिजिटल सेवाओं के उपयोग के दौरान भी तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आईं।
इन शिकायतों ने धीरे-धीरे व्यापक बहस का रूप ले लिया। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह विश्वसनीय और पारदर्शी है। बोर्ड ने इन आरोपों पर कई बार स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि प्रत्येक शिकायत का नियमानुसार परीक्षण किया जा रहा है और किसी भी वास्तविक समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ।
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और उससे संबंधित अनुबंध प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। विभिन्न पक्षों ने यह जानने की मांग की कि डिजिटल मूल्यांकन सेवाओं के लिए एजेंसी का चयन किस आधार पर किया गया और टेंडर प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा शुरू हो गई।
बढ़ते विवाद और सार्वजनिक स्तर पर उठ रही चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक समिति गठित की गई है, जो डिजिटल मूल्यांकन सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, नियमों के अनुपालन और सेवा प्रदाता के चयन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी। माना जा रहा है कि जांच के दौरान पूरी प्रक्रिया का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की संभावित अनियमितता या प्रक्रिया संबंधी कमी का पता लगाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का एक साथ तबादला केवल नियमित प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर सरकार की गंभीरता के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह कदम जवाबदेही सुनिश्चित करने और छात्रों का भरोसा बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा।
