• कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले, किसानों को घबराने नहीं बल्कि सजग रहने की जरूरत


नई दिल्ली : देश में खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही संभावित अल नीनो प्रभाव और सामान्य से कम बारिश की आशंका को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी संबंधित विभागों और राज्य सरकारों को समय रहते ठोस तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।


कृषि भवन में आयोजित बैठक में दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति, संभावित अल नीनो प्रभाव, जल उपलब्धता, बीज भंडारण, फसल रणनीति और राज्यों की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान का भी उल्लेख किया गया, जिसके अनुसार वर्ष 2026 में देश में मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। साथ ही मानसून के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने के संकेत भी मिले हैं, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को पहले से सतर्क रहने और जिला स्तर तक तैयारियां मजबूत करने को कहा है।


शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम का पूर्वानुमान महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी जमीनी स्तर पर तैयारी है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन राज्यों और जिलों में कम वर्षा, लंबे सूखे अंतराल या अल नीनो का अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है, वहां विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संकट की स्थिति में किसानों को तत्काल सहायता और सलाह उपलब्ध हो सके।


बैठक के दौरान जल संसाधनों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण संतोषजनक स्थिति में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जलाशयों का भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर की तुलना में 127.01 प्रतिशत है। सरकार का मानना है कि यह स्थिति खरीफ फसलों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


केंद्रीय मंत्री ने बीज उपलब्धता को लेकर भी अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हैं तथा आपात परिस्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार रखा गया है। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि किसानों तक केवल पर्याप्त मात्रा में ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज भी पहुंचाए जाएं। आवश्यकता पड़ने पर कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों को प्राथमिकता देने की भी सलाह दी गई।


शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कम बारिश की स्थिति में नमी संरक्षण और जल प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण हथियार साबित होंगे। उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग और अन्य एजेंसियों को खेत-तालाब, जल संरक्षण संरचनाओं, वर्षा जल संचयन और उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर तत्काल काम करने को कहा। उनका मानना है कि यदि जल का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए तो कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।


बैठक में रोग और कीट प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया गया। कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि मौसम में बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित रोगों और कीट प्रकोपों की पहले से पहचान कर किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाई जाए। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल संदेश, कॉल सेंटर और स्थानीय कृषि तंत्र का प्रभावी उपयोग करने को कहा गया।


उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि किसानों तक मौसम, बुवाई, सिंचाई, रोग-कीट नियंत्रण और वैकल्पिक फसल विकल्पों से जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल संदेशों और अन्य माध्यमों से पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि आज तकनीक और डेटा की उपलब्धता पहले की तुलना में कहीं बेहतर है, इसलिए सही समय पर सही सलाह किसानों तक पहुंचाना संभव है और इसी दिशा में सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना चाहिए।


बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिमों का आकलन करना नहीं, बल्कि समय रहते ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे और खेती की गतिविधियां प्रभावित न हों। उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर जल प्रबंधन, पर्याप्त बीज भंडारण, आधुनिक तकनीक, प्रभावी संचार व्यवस्था और केंद्र-राज्य समन्वय के बल पर किसी भी संभावित मौसमीय चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है।