- सड़क संपर्क प्रभावित होने के बाद प्रशासन और बचाव दलों ने संभाला मोर्चा
जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय जिला किश्तवाड़ में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली और दो अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाओं ने प्रशासन को सतर्क कर दिया। तेज बहाव और मलबे के कारण कई मार्ग प्रभावित हुए, जिससे कुछ क्षेत्रों में आवागमन बाधित हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि देर शाम तक किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या संपत्ति को बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली।
जानकारी के अनुसार, जिले के सारथन क्षेत्र के गाहन इलाके और माछीपाल क्षेत्र में बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का जायजा लेना शुरू कर दिया और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों से अचानक आए पानी और मलबे के कारण कई संपर्क मार्ग प्रभावित हुए। विशेष रूप से द्राबशाला और गुज्जुवा के बीच स्थित पहाड़ी क्षेत्र में तेज बहाव के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके चलते द्राबशाला जीरो प्वाइंट, सुरु-सार्थल, गान और माछीपाल सहित कई क्षेत्रों की सड़कें अवरुद्ध हो गईं।
जिला प्रशासन के अनुसार कुल 34 सड़कें किसी न किसी रूप में प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद राहत और बहाली कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। मशीनों और कर्मचारियों को मौके पर तैनात कर सड़कों से मलबा हटाने का काम जारी है। प्रशासन का दावा है कि द्राबशाला की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग को काफी हद तक साफ कर यातायात बहाल करने की दिशा में प्रगति की गई है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। उन्होंने बताया कि जिला रेड क्रॉस, पुलिस, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई हैं। उनका कहना है कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य प्रभावित इलाकों में त्वरित राहत पहुंचाना और सड़क संपर्क को जल्द से जल्द बहाल करना है।
प्रशासन ने मानसून के मद्देनजर लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। नागरिकों को नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन, नियंत्रण कक्ष या राजस्व अधिकारियों को देने का आग्रह किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए जाएंगे। फिलहाल राहत की बात यह है कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखते हुए निगरानी और राहत कार्य तेज कर दिए हैं।
