सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 10 जुलाई तक परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का ब्यौरा भेजने का आदेश


नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को परिसरों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवारा कुत्तों की समस्या पर किए गए इंतजामों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन संस्थानों ने अब तक निर्धारित प्रारूप में जानकारी नहीं भेजी है, उन्हें 10 जुलाई तक हर हाल में अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी।

यूजीसी की ओर से कुलपतियों और प्राचार्यों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उच्च शिक्षण परिसरों में आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकने तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से साझा की जाए। आयोग ने बताया कि इस विषय पर पूर्व में भी कई बार दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन कुछ संस्थानों की ओर से अभी तक अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद तेज हुई है, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ते कुत्ता काटने के मामलों को गंभीर चिंता का विषय माना गया था। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित बनाया जाए।

कोर्ट ने स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा था कि वे संबंधित क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने, उनका टीकाकरण और नसबंदी कराने तथा निर्धारित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। इस प्रक्रिया में पशु जन्म नियंत्रण नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन स्थानों से कुत्तों को हटाया जाए, उन्हें दोबारा उसी इलाके में नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि इससे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का उद्देश्य प्रभावित होगा। अदालत ने आदेशों की अनदेखी होने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराने की चेतावनी भी दी थी।

यूजीसी ने कहा है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाकर समय पर अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।