• सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद राज्यसभा जाने से इनकार करते हुए सक्रिय राजनीति में बने रहने का ऐलान किया


नई दिल्ली : कर्नाटक की राजनीति में कई महीनों से चल रहा सत्ता संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने साफ कर दिया कि वे राज्यसभा की राजनीति में नहीं जाएंगे और कर्नाटक की सक्रिय राजनीति में विधायक के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। इसके साथ ही कांग्रेस नेतृत्व ने डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लगभग तय कर दिया है।


सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बना ली है। बताया जा रहा है कि इस फैसले से पहले पार्टी नेतृत्व और सिद्धारमैया के बीच लंबी चर्चा हुई थी। इसके बाद सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर सहमति जताई। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वे राज्यसभा नहीं जाना चाहते।


80 वर्षीय सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए थे। दूसरी ओर डीके शिवकुमार समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे। कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय तक इस मामले में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा, क्योंकि दक्षिण भारत की राजनीति में दोनों नेताओं की अपनी-अपनी मजबूत पकड़ मानी जाती है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु और केरल में पार्टी की स्थिति मजबूत होने के बाद कांग्रेस अब कर्नाटक में नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। इसी क्रम में राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच हुई अहम बैठक को सत्ता परिवर्तन की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।


 डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार, जिन्हें कर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। 15 मई 1962 को जन्मे डीके शिवकुमार करीब चार दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में हैं और उन्हें कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है।

यूथ कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले डीके ने बेहद कम उम्र में ही राजनीति में अपनी अलग पहचान बना ली थी। उन्होंने 1985 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। भले ही उस चुनाव में उन्हें हार मिली, लेकिन उसी समय से वे कर्नाटक की राजनीति में मजबूत दावेदार के रूप में उभरने लगे थे।


कनकपुरा सीट से उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। एक समय जनता दल का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर डीके शिवकुमार ने अपनी ऐसी पकड़ बनाई कि वे लगातार कई बार विधायक चुने गए। उनके समर्थक उन्हें ‘कनकपुरा की चट्टान’ कहकर संबोधित करते हैं।


2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे भी डीके शिवकुमार की रणनीति और संगठन क्षमता को बड़ी वजह माना गया था। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने कठिन दौर में भी कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाए रखा।


अब मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने के साथ ही डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्नाटक में कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना होगी। वहीं सिद्धारमैया की सक्रिय मौजूदगी यह संकेत देती है कि राज्य की राजनीति में उनका प्रभाव अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में दोनों नेताओं की नई भूमिकाओं पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।