कार्रवाई के नाम पर वार्डेन को बदल दिया गया, पांच सदस्यीय जांच समिति गठित

निखिल पाण्डेय

गोरखपुर MMMUT की गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं की निजता, सम्मान और सुरक्षा को लेकर उठी विरोध की आंधी के आगे जांच की मजबूत दीवार खड़ी कर दी गई। कार्रवाई के नाम पर वार्डेन को बदल दिया गया। बुधवार को MMMUT में गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने अपनी निजता और सम्मान के साथ-साथ सुरक्षा का मसला उठाते हुए जब अपनी आवज बुलंद की और इसके बाद उठे बवाल के उबाल को ठंडा करने के लिए MMMUT प्रशासन के साथ जिला और पुलिस प्रशासन का मंथन देर रात तक चला। इस मंथन के बाद जो रिजल्ट आया, उससे यह तस्वीर तो साफ हो गई कि जिस तरह की कार्रवाई की मांग को लेकर कैंपस में उबाल दिख रहा था, उस पर ठंडा पानी डाल दिया गया है।

कारण छात्राओं की प्राइवेसी से जुड़े इतने पैनिक मामले में प्रशासन और पुलिस का न ही कोई एक्शन दिखा और न ही कोई त्वरित पुलिसिया कार्रवाई। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ वार्डेन को बदलने का मामला सामने आया। जांच कमेटी बना दी गई है। जांच के लिए जो कमेटी बनाई गई है उसमें जिला प्रशासन की ओर से वित्त नियंत्रक, MMMUT के दो सदस्य और गोरखुपर विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसर को शामिल किया गया है। यह कमेटी जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी, जांच में दोष सिद्ध होने पर कमेटी कार्रवाई की सिफारिश करेगी। 

जबकि जिस तरीके से MMMUT में गर्ल्स हास्टल की छात्राओं के वायरल वीडियों में बगैर सूचना के पुरुष फैकेल्टी और गार्ड के प्रवेश के बाद नंगा नाच करने का मामला सामने आया, उसमें प्रथम दृष्टया तो तथ्य किसी भी इंसान को हिला देगा। लेकिन सवाल बड़े संस्थान का है, सवाल बड़े लोगों का है, इन सबके के आगे दूर-दराज से आकर हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने आईं छात्राओं की क्या विसात है। हॉस्टल की छात्राओं की निजता, सम्मान और सुरक्षा खतरे में पड़े तो पड़े इससे क्या फर्क पड़ने वाला है। वैसे भी छात्राओं को परीक्षा, परिणाम और प्लेसमेंट इन सब को प्रभावित करने भय पहले ही दिखा दिया गया था।

बुधवार को हंगामे के बाद गुरुवार को MMMUT रजिस्टार का बयान सामने आया। रजिस्ट्रार ने बताया की घटना के तत्काल बाद हॉस्टल के वार्डन को बदल दिया गया है और घटना की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। इसमें दो सदस्य प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के और दो सदस्य गोरखपुर विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसर शामिल हैंl प्रशासन की ओर से वित्त नियंत्रक मामले की जांच करेंगेl हंगामे को लेकर जब सवाल किया गया, तो जवाब आया कि छात्राओं में ये भ्रम है कि गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष स्टॉफ नहीं जा सकता, जबकि ऐसा नहीं है। हॉस्टल में आवश्यकता पड़ने पर महिला वार्डन औऱ गार्ड के साथ पुरुष स्टॉफ सूचना देकर जा सकता है। जब बगैर सूचना के लगाए गए आरोप का हवाला देकर पूछा गया तो जवाब टालते हुए जांच पूरी होने तक धैर्य रखने को कहा गयाl अब हमें और आप सब को जांच होने तक धैर्य रखना होगा। अब जांच के बाद ही एक्शन और रिएक्शन सामने आएगा, लेकिन बुधवार को गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष फैकेल्टी और गार्डस के प्रवेश के बाद छात्राओं का जो रिएक्शन वायरल हो रहा है, उसे भी हमें याद रखना होगा।

इस पूरे प्रकरण पर जब गोरखपुर विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष डॉ. चेतना पांडेय से जब बातचीत की गई तो उन्होंने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। कहा कि बात जो भी हो, लेकिन छात्राओं के कमरों में पुरुष प्रोफेसर का प्रवेश करने के तरीके और व्यवहार पर जो बातें सामने आ रही हैं, वह बहुत निंदनीय है। इस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए l व्यवस्था को अराजक, अमर्यादित नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस विषय पर जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि बच्चियों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा हो l एक तरफ नारी वंदन औऱ दूसरी तरफ बच्चियों की निजता के प्रति असम्मान यह यक्ष प्रश्न खड़ा करता है। ये बात सभी को समझनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी से जब इस पूरे प्रकरण पर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का मामला मेरे संज्ञान में है। इस संबंध में मेरी कुलपति प्रो. जेपी सैनी से बात हुई है। उन्होंने बताया कि वार्डन को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। साथ ही, पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसे निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।