20 दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया
निखिल पांडेय
राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश व ललित कला एवं संगीत विभाग दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला के समापन शनिवार को हुआ। इस अवसर पर ललित कला एवं संगीत विभाग में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। दो वर्गों में आयोजित यह कार्यशाला 10 से 17 वर्ष और 18 वर्ष से ऊपर के आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए आयोजित थी।
इसका उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण (DSW) प्रोफेसर अनुभूति दुबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के आरंभ में कार्यशाला के संयोजक डॉ. प्रदीप साहनी व सह संयोजक डॉ. गौरी शंकर चौहान ने पुष्पगुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
जूनियर और सीनियर वर्ग के 80 प्रतिभागियों द्वारा 20 दिन में सीखे गए चित्रकला के विविध आयामों जैसे लैंडस्केप, मिनिएचर पेंटिंग, लोक कला, पोट्रेट पेंटिंग और मॉडर्न आर्ट जैसी चित्रकारी को अतिथियों के साथ-साथ दर्शकों और कला प्रेमियों ने खूब सराहा। प्रतिभागियों की मार्मिक पेंटिंग को देख भावविभोर होते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि इस चित्रकला कार्यशाला के प्रदर्शनी में कम उम्र के कलाकारों में बड़े स्तर की प्रतिभा देखने को मिली, उनकी कृतियों में मौलिकता, भावपूर्णता और रंगों की सुंदरता ने बेहद आकर्षित किया। इतनी उत्कृष्ट कृतियों को तैयार कराने वाले दो प्रशिक्षकों शिवम कुमार गुप्ता और अभिषेक श्रीवास्तव की भी उन्होंने सराहना की। मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया और उनकी बनाई पेंटिंग को खूब सराहा।
प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा कि इस कार्यशाला से प्रतिभागियों की कला में अत्यधिक निखार आया है। उनकी कलात्मक समझ में वृद्धि हुई है, जिसके सहारे वह आगे और भी अच्छी कलाकृतियों का निर्माण कर सकते हैं।
इस कार्यशाला की संरक्षिका एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन व ललित कला एवं संगीत विभाग की अध्यक्ष एवं तरंग प्रकोष्ठ की निदेशिका प्रोफेसर उषा सिंह ने आयोजक मंडल सहित इस सफल कार्यशाला एवं प्रदर्शनी के सभी प्रतिभागियों को बधाई दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉक्टर गौरी शंकर चौहान ने प्रदर्शनी में आए हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, दर्शकों व विद्यार्थियों का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर अनेक प्रतिभागी, विद्यार्थी और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
"जिस तरह की कलाकृतियाँ इस प्रदर्शनी में देखने को मिली हैं उससे ये पता चलता है कि नई पीढ़ि में कलात्मक चेतना की कमी नहीं है, बस सही दिशा औऱ मार्गदर्शन की आवश्यकता है, विश्वविद्यालय ने वह मंच दिया है। इसके लिए हम कुलपति महोदया के प्रति आभारी हैं।“– प्रो. अनुभूति दूबे
"20 दिनों के इस प्रशिक्षण शिविर में जिस उत्साह से प्रशिक्षुओं नें प्रतिभाग किया है औऱ बारीकीयों को जिस उत्साह से समझा है वह प्रशंसनीय है l हमलोगों नें जो भी समझाया सिखाया प्रशिक्षुओ नें बहुत तत्परता से सीखा।“- शिवम् गुप्ता, प्रशिक्षक
"इस कार्यशाला में हमने बहुत कम समय में चित्र कला की विविध बारीकियों को सीखा समझा। हमें प्रशिक्षकों द्वारा बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई गईं, जिनसे हमें आगे भी मदद मिलेगी औऱ अपने कला कौशल को निखारने में मदद मिलेगी। गोरखपुर विश्वविद्यालय को आभार इस कार्यशाला के आयोजन के लिए"।–आस्था, प्रशिक्षु
