- पीएम मोदी ने घोषित की स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप, रोम में मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की अहम मुलाकात
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे ने भारत और इटली के रिश्तों को एक नई ऊंचाई देने का संकेत दिया है। दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई विस्तृत वार्ता में दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक पहुंचाने की घोषणा की। यह फैसला केवल कूटनीतिक संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और इटली के बीच बढ़ते भरोसे और साझेदारी का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
साझा बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ कई बार बातचीत और मुलाकात का अवसर मिला है, जिसने दोनों देशों के बीच गहरे सामंजस्य और सहयोग को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि मेलोनी के नेतृत्व में भारत-इटली संबंधों को नई गति, नई दिशा और नया आत्मविश्वास मिला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इटली ने आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक रणनीतिक कार्ययोजना तैयार की है। “इंडिया-इटली जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के जरिए दोनों देश भविष्य की साझेदारी को व्यावहारिक और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि यह रोडमैप दोनों देशों के सहयोग को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करेगा।
बैठक के दौरान आर्थिक और औद्योगिक सहयोग भी चर्चा के केंद्र में रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इटली की पहचान दुनिया में डिजाइन, गुणवत्ता और सटीकता के लिए है, जबकि भारत बड़े स्तर पर नवाचार, प्रतिभा और किफायती समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश “डिजाइन एंड डेवलप इन इंडिया एंड इटली, एंड डिलीवर फॉर द वर्ल्ड” की सोच के साथ आगे बढ़ेंगे।
रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को भी दोनों देशों ने नई प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इटली के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग आपसी विश्वास की गहराई को दर्शाता है। दोनों देशों की सेनाओं के साथ-साथ रक्षा उद्योगों के बीच भी भागीदारी मजबूत हो रही है। डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के जरिए को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन के नए रास्ते खुल रहे हैं, जिससे भविष्य में रक्षा निर्माण और तकनीक साझेदारी को गति मिलने की उम्मीद है।
समुद्री क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने विशेष रुचि दिखाई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्री शक्तियों के रूप में भारत और इटली के बीच कनेक्टिविटी और ब्लू इकोनॉमी में साझेदारी स्वाभाविक है। दोनों देश शिपिंग, पोर्ट मॉर्डनाइजेशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों देशों ने एकजुटता दिखाई। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा है और इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत और इटली ने आतंक के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए साझा पहल की है, जो दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है। दोनों देशों ने यह संदेश दिया कि जिम्मेदार लोकतंत्र केवल आतंकवाद की आलोचना तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई भी करते हैं।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का स्पष्ट मत है कि हर संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी हल नहीं हो सकता और वैश्विक शांति के लिए संवाद सबसे जरूरी माध्यम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और इटली के संबंध केवल राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव भी बेहद मजबूत है। अगले वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर “ईयर ऑफ कल्चर” मनाया जाएगा, जिससे सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूती मिलेगी।
इटली दौरे के दौरान हुई यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे माहौल में भारत और इटली का एक-दूसरे के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ाना वैश्विक राजनीति में भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
