बंगाल से मिला सुजीत, मामला वर्ष 2020 का था और लंबे समय तक जांच सवालों के घेरे में रही
अरुण शाह
बिहार के मुजफ्फरपुर में पांच साल पहले एक मां की आंखों से ओझल हुआ बेटा आखिरकार मिल गया। इंतजार, पीड़ा और उम्मीद के लंबे सफर के बाद यह खबर न सिर्फ उस परिवार के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि पुलिस के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आई है। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से वर्ष 2020 में गायब हुए सुजीत कुमार को पश्चिम बंगाल से सकुशल बरामद कर लिया गया है। इस कार्रवाई को थाना अध्यक्ष विपिन रंजन की टीम ने अंजाम दिया है।
यह मामला शहर के उन चर्चित मामलों में शामिल रहा है, जिसने लंबे समय तक प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के हिली बैकुंठपुर से एक महिला शैफाली अपने तीन बेटों के साथ मजदूरी करने मुजफ्फरपुर पहुंची थी। वह ठेकेदार अजिराउल के माध्यम से ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एमआईटी इलाके में काम कर रही थी।
घटना 15 नवंबर 2020 की है, जब ठेकेदार के मुंशी वीरेंद्र कुमार ने शैफाली के बेटे सुजीत को काम के बहाने बुलाकर बीबीगंज ले जाने की बात कही। इसके बाद सुजीत वापस नहीं लौटा। जब मां ने मुंशी से पूछताछ की तो उसने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि सुजीत बीबीगंज गया ही नहीं। इसके बाद शैफाली अपने बेटे की तलाश में कई दिनों तक शहर में भटकती रही।
आखिरकार 26 नवंबर 2020 को ब्रह्मपुरा थाने में सुजीत के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया। इसके बाद यह मामला धीरे-धीरे शहर का एक चर्चित केस बन गया। लेकिन जांच की रफ्तार पर लगातार सवाल उठते रहे। आरोप लगा कि तत्कालीन नगर डीएसपी राम नरेश पासवान ने इस मामले में एक साल तक समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया, जिसके कारण जांच प्रभावित हुई।
इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए वर्ष 2025 में गृह विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की और 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब भी तलब किया गया। यह कदम इस बात का संकेत था कि मामले को लेकर प्रशासन भी सवालों के घेरे में था।
अब जब सुजीत की बरामदगी हुई है, तो यह केवल एक व्यक्ति की वापसी नहीं, बल्कि उस लंबे इंतजार का अंत है, जिसने एक मां को वर्षों तक बेचैन रखा। साथ ही यह पुलिस के लिए भी एक महत्वपूर्ण सफलता है, जिसने एक पुराने और उलझे हुए मामले को सुलझाने में कामयाबी हासिल की है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि शुरुआती स्तर पर जांच में तेजी और गंभीरता दिखाई जाती तो शायद यह मामला इतने लंबे समय तक न खिंचता। फिलहाल सुजीत की सकुशल बरामदगी से परिवार में खुशी का माहौल है, जबकि पुलिस इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है।
