दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से सुंदरकांड कथा का हुआ आयोजन

लखनऊ (यूपी)

आशुतोष जी महाराज की शिष्या साध्वी रितु भारती सुंदर कांड की कथा का वर्णन करते हुए हनुमान जी के 100 योजन समुद्र पार करने का वर्णन किया। कथा में बताया कि लंका पहुंच कर भक्त हनुमान की प्रथम भेट लंकिनी से हुई| आगे प्रवेश न देने के कारण भक्त हनुमान ने लंकिनी पर मुष्टिका प्रहार किया और लंकनी रुधिर वमन करते हुए भूमि पर गिर गई और उसे मूर्छा आ गई| लंकिनी कहती है कि आपने मुझे बहुत अच्छा सत्संग कराया।

संत तुलसीदास जी रामचरितमानस में इसका वर्णन करते हुए लिखते हैं तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग, तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग| अर्थात हे तात! स्वर्ग और मोक्ष के सब सुखों को तराजू के एक पलड़े में रखा जाए, तो भी वे सब मिलकर (दूसरे पलड़े पर रखे हुए) उस सुख के बराबर नहीं हो सकते, जो लव (क्षण) मात्र के सत्संग से होता है|

साध्वी ने कथा के सार और महत्तव का उल्लेख करते हुए बताया कि जीवन में सभी पुण्य के फल द्वारा मनुष्य को सत्संग श्रवण करने का अवसर प्राप्त होता महापुरुषों ने समझाया सत्संग का यदि संधि विच्छेद करें तो हम जानेंगे (सत्य + संग) सत्य ईश्वर का संग करना| ईश्वर के दर्शनों के पश्चात ही वास्तविक भक्ति का आरंभ होता है।

सुंदरकांड के माध्यम से हम सभी भक्त हनुमान जी भक्ति यात्रा के विषय में जान पाते हैं| इस मौके पर साध्वी कात्यानी भारती, साध्वी मंदाकिनी भारती, साध्वी दीपा भारती जी, साध्वी अर्पण भारती जी भारती जी ने सुमधुर भजनों द्वारा भक्तों को भावमय किया| भोली गांव, ठाकुर द्वारा मंदिर परिसर बक्शी का तालाब में आयोजित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान लखनऊ की ओर से आयोजित इस कथा में भोली गांव के निवासियों ने कथा में बढ़-चढ़ कर भाग लिया| इस मौके पर रिटायर एसएसपी पी. सिंह, भोली गांव के पूर्व प्रधान राज बहादुर सिंह, 51 शक्तिपीठ धाम की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।