• गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए बढ़ी चिकित्सा सहायता की सीमा


पटना : बिहार सरकार ने आम लोगों को राहत देने और विकास परियोजनाओं को गति प्रदान करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं, महिला एवं बाल विकास, उद्योग, ऊर्जा और मत्स्य पालन सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ने वाला है। सरकार का दावा है कि इन निर्णयों से न केवल लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।


बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से जुड़ा रहा। सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को अधिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस योजना की आय सीमा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। अब पहले की तुलना में अधिक परिवार गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी सहायता प्राप्त कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो सीमित आय के कारण महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ रहते हैं।


महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े एक अहम निर्णय में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के रिक्त पदों को भरने का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। लंबे समय से पदोन्नति के माध्यम से इन पदों को भरने में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने विशेष व्यवस्था के तहत सीधी भर्ती का निर्णय लिया है। इसके बाद राज्य में आईसीडीएस और पोषण संबंधी योजनाओं के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।


खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 164.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के माध्यम से छोटे उद्यमियों और समूह आधारित इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।


ऊर्जा क्षेत्र में उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए भी नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के अंतर्गत दो स्तरीय शिकायत निवारण मंच गठित किए जाएंगे। इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर नए पदों का भी सृजन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।


राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण स्वीकृति प्रदान की है। मधुबनी जिले में संचालित एक औद्योगिक इकाई को निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत वित्तीय लाभ देने का निर्णय लिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।


मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने के लिए भोजपुर जिले में एकीकृत जलीय कृषि पार्क स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है। लगभग 31.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विकसित की जाएगी। इस परियोजना से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ इससे जुड़े लोगों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की संभावनाएं मजबूत होंगी।


मंत्रिमंडल के इन निर्णयों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, उद्योगों को प्रोत्साहित करने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं और परियोजनाओं का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचेगा तथा राज्य के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।