नियामक आयोग पहुंचा उत्तर प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर को बिना अनुमति प्रीपेड में बदले जाने का मामला

राजकुमार राज

उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब 70 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर को उनकी सहमति के बिना प्रीपेड मोड में बदल दिए जाने कादिया गया। अब यह मामला तूल पकड़ चुका है। यह मुद्दा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ गया है, जो नियामक आयोग के दरवाजे तक पहुंच गया है।

कानपुर की केस्को में हुई सुनवाई के दौरान यह मामला और गंभीर हो गया, जब बिजली कंपनियों पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की गई। इस पर संज्ञान लेते हुए विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन और संबंधित कंपनियों से सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात की और एक विस्तृत लोकहित प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में दिए गए उस स्पष्ट निर्देश का हवाला दिया गया, जिसमें उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर के बीच विकल्प चुनने का अधिकार दिया गया है।

परिषद ने विशेष रूप से 1 अप्रैल 2026 को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के लोकसभा में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर को प्रीपेड में बदलना पूरी तरह गलत है। इसके बावजूद प्रदेश में न केवल पुराने कनेक्शनों को प्रीपेड में बदला गया, बल्कि नए कनेक्शनों में भी इसे अनिवार्य किया जा रहा है, जो केंद्र सरकार के निर्देशों की अवहेलना है। परिषद की मांग है कि प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों को तत्काल निर्देश जारी कर ऐसे सभी मीटरों को वापस पोस्टपेड मोड में बदला जाए। उनका कहना है कि यह केवल तकनीकी मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

इस बीच प्रदेश भर में उपभोक्ताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है। बड़ी संख्या में लोग बिजली कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पावर कॉरपोरेशन की ओर से स्पष्ट आदेश जारी न होने के कारण क्षेत्रीय स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों में असंतोष और नाराजगी दोनों बढ़ रही है। उपभोक्ता परिषद ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और भरोसा रखें कि इस मामले में जल्द ही राहत मिलेगी। परिषद का दावा है कि केंद्र स्तर पर स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और जिन उपभोक्ताओं के मीटर जबरन प्रीपेड किए गए हैं, उन्हें दोबारा पोस्टपेड में बदला जाएगा।

हालांकि परिषद ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नियामक आयोग ने स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी नहीं किए, तो यह समस्या और गहरी हो सकती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को परेशानी होगी, बल्कि उन्हें अपने वैधानिक अधिकारों से भी वंचित होना पड़ेगा। ऐसे में अब सभी की नजर नियामक आयोग के फैसले पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि बिजली कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगती है या फिर उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ती हैं।