दो खुराक में लगेगा टीका, तीन महीने के अंतराल पर होगा टीकाकरण
नई दिल्ली : भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देश के पहले डेंगू टीके क्यूडेंगा (Qdenga®) के विपणन को मंजूरी दे दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि यह मंजूरी औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के तहत गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता की विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद दी गई है।
यह वैक्सीन जर्मनी की टाकेदा जीएमबीएच द्वारा विकसित की गई है, जबकि भारत में इसका आयात टाकेदा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड करेगी। यह पहली बार है जब भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए किसी वैक्सीन को आधिकारिक मंजूरी मिली है।
क्यूडेंगा एक लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन है, जिसे रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। इसका निर्माण वेरो कोशिकाओं में किया जाता है और इसमें डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विशेष आनुवंशिक तकनीक का उपयोग किया गया है। यह टीका आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों पर आधारित है और सूखे चूर्ण के रूप में उपलब्ध होता है, जिसे घोल तैयार करने के बाद त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में लगाया जाता है।
मंत्रालय के अनुसार, यह टीका 4 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए स्वीकृत है। टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 0.5 मिलीलीटर की दो खुराक दी जाएंगी। पहली और दूसरी खुराक के बीच तीन महीने (0 और 3 महीने) का अंतर रखा जाएगा।
टीके को मंजूरी देने से पहले दुनिया के कई देशों में बड़े स्तर पर क्लीनिकल परीक्षण किए गए। इन अध्ययनों में डेंगू प्रभावित और गैर-प्रभावित दोनों क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया। ब्राजील, थाईलैंड और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में इसकी सुरक्षा, प्रतिरक्षा क्षमता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया। भारत में भी 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों पर फेज-3 अध्ययन के जरिए इसके सुरक्षा और प्रतिरक्षा संबंधी परिणामों का आकलन किया गया।
क्यूडेंगा को पहले ही यूरोपीय संघ, ग्रेट ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड सहित 42 देशों में नियामकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा, इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का प्रीक्वालिफिकेशन भी प्राप्त है। अब तक दुनिया भर में इसकी 2.4 करोड़ (24 मिलियन) से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं। जिन देशों में इसका उपयोग हो रहा है, वहां से मिले पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस के आंकड़ों में इसकी सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर चिंता सामने नहीं आई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि इस वैक्सीन की उपलब्धता से देश में डेंगू की रोकथाम के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पहले से चल रहे मच्छर नियंत्रण, रोग निगरानी, समय पर जांच और मरीजों के उपचार जैसे उपायों के साथ यह टीका डेंगू से लड़ाई को और प्रभावी बनाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि वह विज्ञान आधारित नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से देशवासियों तक सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण टीकों तथा दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।