पूर्वांचल के अनुभवी फिजीशियन डॉक्टर त्रिलोक रंजन जी से खास बातचीत…

 

सौम्या द्विवेदी


मौसमी बीमारी की चपेट में आने से इंसान की दिनचर्या बिगड़ जाती है और असहज होकर उल्टी-सीधी दवाओं का सेवन कर लेता है, एक बीमारी ठीक नहीं होती कि दूसरी जन्म लेती हैं। इससे हमारे सामने स्वास्थ्य संबधी चुनौतयां खड़ी हो जाती हैं…इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर कि बदलते मौसम में कैसे स्वस्थ्य रहे, क्या करें, क्या नहीं करें, कैसे सामंजस्य बैठाएंइन तमाम सवालों को लेकर “पंचायत वॉयस” ने अपने प्रवेशांक अंक में पाठकों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से अपडेट करने के लिए पूर्वांचल के वरिष्ठ और अनुभवी फिजीशियन डॉक्टर त्रिलोक रंजन जी एक खास मुलाकात की, हमारे पाठक इससे लाभान्वित हों। आइए जानते हैं इस खास बातचीत “सेहत की बात” अंश…   


सवाल : सबसे पहले आपसे जानना चाहेंगे कि बदलते मौसम में खासकर अब जब गर्मी की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में  सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं कौन-सी हैं औऱ हम स्वस्थ रहने के लिए किस तरह सामंजस्य बनाएं..?

जवाब : किसी भी मौसम में तापमान का बदलाव हमारे शरीर पर प्रभाव डालता है, क्यूंकि हमारे शरीर का तापमान निश्चित है। गर्मियों में तापमान बढ़ने से पसीने के माध्यम से हमारे शरीर से तरल पदार्थ का लगातार ह्रास होता है।इसमें केवल पानी ही नहीं निकलता, बल्कि उसके साथ इलेक्ट्रो लाइट्स, खनिज भी चला जाता है। इसलिए जो चीज़ शरीर से बाहर हो रही है, उसकी आपूर्ति भी होती रहे इसको ध्यान रखना चाहिए।दूसरी बात तापमान बढ़ने से ऐसे पैथोजेन्स, वायरस, बैक्टीरिया, अमीबा भी निकलते हैं, जिनके विकास के लिए  तापमान अनुकूल होने पर उनकी वृद्धि ज्यादा होने की सम्भावना बढ़ जाती है, जिससे उनके द्वारा होने वाली बीमारियां भी बढ़ने लगती हैं।तीसरी बात ये कि नियमित उपयोग में आने वाली जो चीजें है, मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ वो जल्दी खराब होने लगते हैं। इसमें पैथोजेन्स की वृद्धि होने से खाद्य पदार्थो से होने वाली बीमारियां बढ़ेंगी।अगर इन सामान्य बातों का ध्यान रखा जाए औऱ कुछ सतर्कता बरतें तो तापमान के बदलाव के साथ एक सामंजस्य बनाया जा सकता है।


सवाल : एक समस्या डिहाइड्रेशन की जो बड़ों औऱ बच्चों दोनों में दिखती है। इसके शुरुआती संकेत क्या हैं, और अगर ये समस्या है तो उसके घरेलू उपचार क्या हैं औऱ कब हमें डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए…जवाब : देखिये शरीर के लिए आवश्यक पानी की मात्रा से कम पानी होना ही डिहाइड्रेशन है। गर्मियों में यदि हम आवश्यकता से कम पानी का उपयोग करते हैं तो डिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।इसके शुरुआती संकेत यह है की मरीज को बहुत तेज प्यास लगती है, दूसरा जीभ लगातार सूखने लगती है औऱ सबसे अधिक गंभीर संकेत जिसे सामान्य व्यक्ति भी पहचान सकता है, वो ये कि उसकी पेशाब की आवृत्ति कम हो जाएगी।एक सामान्य व्यक्ति दिन भर में कम से कम 6 बार पेशाब करता है। अगर ये कम हो रहा है, तो ये डिहाइड्रेशन के संकेत है। ऐसे में ओआरएस घोल या नींबू-चीनी-पानी का घोल प्रयोग करें, यदि आराम नहीं मिलता तो तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।


सवाल  हीट-एक्सहॉशन और हीट-स्ट्रोक में फर्क क्या है, इसको कैसे पहचानें और ऐसा होने पर तुरंत क्या करना चाहिए…?

जवाब : ये दोनों तापमान बढ़ने के कारण होने वाली समस्या है।यदि बाहरी वातावरण में व्यक्ति का आना जाना अधिक  समय के लिए या लगातार है और यदि इस वजह से पानी की कमी होती जा रही है, तो इसमें  बहुत अधिक मात्रा में पसीना आना शुरू हो जाता है। हाथ पैर ठंडा होने लगता हैं। यह हीट-एक्सहॉशन है। जबकि अगर तापमान अचानक से बहुत तेज हो जाए और उसी के साथ व्यक्ति के शरीर का तापमान 104 या उससे अधिक हो जाए, तो इसे हीट स्ट्रोक कहते हैं। हीट-एक्सहॉशन  होने पर व्यक्ति को ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए उसको तरल पदार्थ देते रहें, तो वह धीरे-धीरे घर पर भी सामान्य हो सकता है। जबकि हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें मरीज को जान का खतरा भी हो सकता है।ऐसी स्थिति में उसे तत्काल चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है। उसे हॉस्पिटल ले जाना चाहिए।


सवाल : लू लगने पर घरेलू उपाय क्या हो सकता है और डॉक्टर को कब दिखाना ज़रूरी है…?

जवाब : यदि लू लगने पर मरीज को प्यास लगे या जीभ सूखने तक की समस्या है तो घर पर उसको ओआरएस और पानी दिया जाए, लेकिन अगर पेशाब की आवृत्ति कम हो रही है तो बीमारी बढ़ सकती है, इसलिए घरेलू इलाज को छोड़कर ऐसे किसी भी व्यक्ति या मरीज को तत्काल चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए, ताकि उसका समुचित इलाज हो सके


सवाल : गर्मी में स्किन-रैशेज, सनबर्न, फंगल इन्फेक्शन की समस्या गंभीर रूप ले लेती है, इसकी रोकथाम के लिए हमें क्या उपाय करने चाहिए…?

जवाब : ये महत्वपूर्ण सवाल है।  ट्रैवलर या जो लोग बाहर काम करते हैं, विशेष रूप से महिलाएं, इसके अलावा मज़दूर, डिलीवरी स्टाफ इनके लिए ये समस्या है।

इन समस्याओं में घर पर किसी भी तरह का प्रयोग या उपचार करने से बचें औऱ तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।


सवाल : जो स्कूल जाने वाले बच्चे हैं, वो ख़ुद अपनी देखभाल नहीं कर सकते हैं तो उनके माता-पिता क्या कुछ खास करना चाहिए।

जवाब : बच्चों के स्कूल बैग के साथ पानी की बोतल जरूर रखें।बोतल नियमित साफ हो, उन्हें घर का बना ताज़ा खाना साफ बर्तन में दिया जाना चाहिए और प्रयास हो कि बाहर का खाना विशेष रूप से खुले स्थान पर मिलने वाले ठेले दुकानों पर मिलने वाली चीजों  को खाने से रोकना चाहिए।  थोड़ी-थोड़ी देर में पानी जरूर पिलाते रहें भले प्यास लगे या ना लगे।


सवाल : आजकल यूथ औऱ सीनियर लोगों में भी वर्कआउट का एक क्रेज दिखता है। क्या गर्मी के मौसम में कुछ विशेष सावधानी बरतनी चाहिए…?

जवाब : हालांकी अब जिम समान्यता एसी युक्त होते हैं मगर फ़िर भी यदि पसीना ज्यादा होता है तो अवश्यकतानुसार व्यायाम करना चाहिए। साथ में एनर्जी ड्रिंक्स लें और पानी का सेवन खूब करें।


सवाल जो मरीज हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ जैसी समस्याओ से ग्रसित हैं उनके लिए कुछ सलाह…?

जवाब : ऐसे मरीजों के लिए जरूरी है कि अपने डॉक्टर से परामर्श करके जो भी निर्देश मिले उन्हें पालन करें, ताकि तापमान के बढ़ने से कोई अन्य समस्या ना हो।


सवाल : अंत में आपसे जानना चाहेंगे कि गर्मियों में हमें कैसा रूटीन follow करना चाहिए…?

जवाब : सामान्य दिनचर्या ही अपनाएं। प्रयास करें कि सुबह जल्दी उठ कर ताजा वायु में प्राणायाम, व्यायाम करें। बहुत भारी कसरतों से बचें।भोजन ताज़ा एवं सुपाच्य हो, बहुत तली भुनी तेज मसाले वाले भोजन से परहेज रखें और पानी भरपूर मात्रा में लें। सेहत के लिए यह फायदेमंद है।