हड़ताल से पहले 29 की शाम मशाल जुलूस निकाला जाएगा


मुजफ्फरपुर : श्रावण माह में जब शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की तैयारी है, ठीक उसी समय बिहार के नगर निकायों में सफाई व्यवस्था और जलापूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्यभर के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के कर्मचारी 30 जुलाई से अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। ऐसे में आम लोगों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन और स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के संयुक्त आह्वान पर शुरू होने वाली इस हड़ताल में नगर निकायों के स्थायी, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शामिल होंगे। हड़ताल शुरू होने से एक दिन पहले, यानी 29 जुलाई की शाम राज्यभर में मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

मुजफ्फरपुर में इस हड़ताल का असर अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है। श्रावण के अवसर पर बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए हजारों कांवरिये और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे समय में यदि नगर निकाय की सेवाएं प्रभावित होती हैं तो मंदिर परिसर और शहर की साफ-सफाई, कचरा उठाव तथा पेयजल आपूर्ति जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।

हड़ताल का मुख्य मुद्दा नगर निकाय कर्मियों की सेवा से जुड़ी लंबित मांगें हैं। कर्मचारी संगठन दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मियों की सेवाओं का नियमितीकरण चाहते हैं। इसके अलावा आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर संबंधित कर्मियों को सीधे नगर निकाय का कर्मचारी घोषित करने तथा उन्हें एसीपी और एमएसीपी जैसी सेवा संबंधी सुविधाओं का लाभ देने की भी मांग की जा रही है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से बड़ी संख्या में कर्मी अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल रहे हैं। कई बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं होने के कारण अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया है।

यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच समय रहते कोई सहमति नहीं बनती है तो राज्य के शहरी क्षेत्रों में साफ-सफाई, कचरा उठाव, जलापूर्ति और अन्य नगर निकाय सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में श्रावण माह के दौरान धार्मिक आयोजनों और आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों पर भी इसका व्यापक असर पड़ने की आशंका है।