- लेफ्ट के गढ़ में दरार, दस साल बाद सत्ता परिवर्तन के आसार
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली : केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल ने राज्य की राजनीति में बड़ा संकेत दिया है। लंबे समय से लेफ्ट का मजबूत गढ़ माने जाने वाले केरल में इस बार सत्ता परिवर्तन के आसार नजर आ रहे हैं। सीपीआई एम के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट पिछले दस वर्षों से सत्ता में है, लेकिन इस बार एंटी इनकंबेंसी का असर साफ दिख रहा है और लेफ्ट का किला कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
न्यूज 18 और वोट वाइब के एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट बढ़त में दिखाई दे रहा है। इस सर्वे में यूडीएफ को 70 से 80 सीटें मिलने का अनुमान है, जिसका मिड प्वाइंट 75 है। वहीं एलडीएफ को 58 से 68 सीटों के बीच सीमित बताया गया है, जिसका मिड प्वाइंट 63 है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को 0 से 4 सीटें मिलने का अनुमान है, जिसका मिड प्वाइंट 2 है।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो एलडीएफ को उत्तर केरल में 16 से 20, मध्य क्षेत्र में 24 से 28 और दक्षिण में 18 से 20 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं यूडीएफ उत्तर में 28 से 31, मध्य में 25 से 29 और दक्षिण में 17 से 19 सीटें हासिल कर सकता है। एनडीए को उत्तर और मध्य क्षेत्रों में 0 से 2 तथा दक्षिण में भी 0 से 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
वोट शेयर के मामले में भी यूडीएफ बढ़त बनाता नजर आ रहा है। अनुमान के मुताबिक यूडीएफ को 42.6 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं, जबकि एलडीएफ को करीब 39.5 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है। एनडीए का वोट शेयर भी बढ़कर करीब 14.3 से 15 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो राज्य में उसकी पकड़ मजबूत होने का संकेत देता है। अन्य दलों के खाते में करीब 3.6 प्रतिशत वोट जाने का अनुमान है।
केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान हुआ था और बहुमत के लिए 71 सीटों की जरूरत होती है। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त होने वाला है। पिछले चुनाव में एलडीएफ ने 99 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी और पिनाराई विजयन ने मुख्यमंत्री पद संभाला था। इस बार यूडीएफ ने किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है।
गौरतलब है कि केरल के साथ पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। एग्जिट पोल के इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है, हालांकि अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
