• गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ ही यात्रा का आरंभ होगा

Panchayat Voice : राज्य की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा की औपचारिक शुरुआत होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी धामों तक यात्रियों को पहुंचाने की जिम्मेदारी परिवहन कंपनियों के संयुक्त रोटेशन पर रहेगी, जिसके तहत बसों का संचालन किया जाएगा।

चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश से सबसे अधिक बसें यात्रियों को लेकर धामों की ओर रवाना होती हैं। यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए संयुक्त रोटेशन की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। परिवहन कंपनियों के प्रतिनिधि लगातार बैठकों के माध्यम से व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।


संयुक्त रोटेशन के अध्यक्ष भास्करानंद भारद्वाज ने बताया कि यात्रा के लिए बसों का चयन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। अप्रैल के पहले सप्ताह में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लॉटरी में बसों के नंबर निकाले जाते हैं और उसी के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन सी बस किस यात्रा रूट पर जाएगी। इससे सभी परिवहन कंपनियों को समान अवसर मिलता है और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहती है।


उन्होंने बताया कि वर्तमान में संयुक्त रोटेशन के पास लगभग 2200 बसों का बड़ा बेड़ा उपलब्ध है। इनमें से करीब 60 प्रतिशत बसों को चारधाम यात्रा मार्ग पर लगाया जाएगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत बसें स्थानीय रूट पर संचालित होती रहेंगी। इस व्यवस्था के माध्यम से यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।


संयुक्त रोटेशन में कुल 10 परिवहन कंपनियां शामिल हैं। इनमें जीएमओयू, टीजीएमओ, यातायात कंपनी, सीमांत सहकारी समिति, गढ़वाल मंडल कॉन्ट्रैक्ट कैरिज, रूपकुंड पर्यटन विकास समिति, दून वैली कॉन्ट्रैक्ट कैरिज, गढ़वाल मंडल बहुउद्देशीय समिति, यूजर्स रामनगर और हरिद्वार कॉन्ट्रैक्ट कैरिज जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन कंपनियों की बसें संयुक्त रूप से यात्रा संचालन की जिम्मेदारी निभाती हैं।


चारधाम यात्रा के लिए संयुक्त रोटेशन की परंपरा काफी पुरानी है। इसकी स्थापना वर्ष 1971 में की गई थी। उस समय यात्रियों को व्यवस्थित ढंग से धामों तक पहुंचाने के उद्देश्य से परिवहन कंपनियों को एक मंच पर लाया गया था। शुरुआती दौर में केवल तीन परिवहन कंपनियां जीएमओयू, टीजीएमओ और यातायात कंपनी इस व्यवस्था का हिस्सा थीं और उनके पास कुल 103 बसें थीं। समय के साथ इस व्यवस्था का विस्तार हुआ और आज संयुक्त रोटेशन के पास हजारों बसों का नेटवर्क तैयार हो चुका है।


हालांकि कुछ वर्षों में संयुक्त रोटेशन का गठन नहीं हो सका था। वर्ष 1998 में यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई थी। इसके अलावा वर्ष 2013 में भी कुछ परिवहन कंपनियों ने संयुक्त रोटेशन से अलग होकर संचालन किया था, जिससे यात्रा व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उसी वर्ष जून में आई भीषण आपदा के कारण चारधाम यात्रा अचानक रोकनी पड़ी थी।


समय के साथ परिवहन कंपनियों के सामने नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। अब देश के अन्य राज्यों से भी व्यावसायिक वाहन यात्रियों को लेकर उत्तराखंड पहुंचते हैं। इसके अलावा कई श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से भी यात्रा करते हैं। इससे स्थानीय परिवहन व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।