देवरिया डीएम की अपील : प्रशासन द्वारा जारी सावधानियों का पालन करें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, ताकि भीषण गर्मी एवं प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि को रोका जा सके
गणेश धर द्विवेदी
उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी भारत तक बढ़ते हीटवेव के प्रकोप से बचाने के लिए मौसम विभाग का आगामी पांच दिनों तक जारी किए गए अलर्ट के बाद रविवार को देवरिया डीएम मधुसूदन हुल्गी लाइव आए और जनपदवासियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की। इस अपील में उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी, लू, आकाशीय बिजली व नदी में डूबने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सभी नागरिक सावधानी बरतें, ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। अपने संदेश में कहा कि जनपद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी आपात स्थिति में आमजन की सहायता के लिए तत्पर रहेगा। डीएम ने सभी नागरिकों से अपील की कि प्रशासन द्वारा जारी सावधानियों का पालन करें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, ताकि भीषण गर्मी एवं प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि को रोका जा सके।
डीएम ने कहा कि वर्तमान समय में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे डिहाइड्रेशन, लू लगने एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहर 12 बजे से अपराह्न 3 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। लगातार पानी पीते रहें, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सिर को गमछा, टोपी अथवा कपड़े से ढककर रखें। यात्रा के दौरान पानी साथ रखें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
बताया कि लू लगने पर शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाना, तेज सिरदर्द, त्वचा का लाल एवं शुष्क हो जाना, उल्टी होना और बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को तुरंत छायादार स्थान पर ले जाएं, शरीर पर पानी का छिड़काव करें, पंखा या कपड़े से हवा करें। यदि व्यक्ति होश में हो तो उसे ठंडा पानी पिलाएं। गंभीर स्थिति होने पर तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा की सहायता लेकर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं।
डीएम ने मजदूरों और श्रमिकों से भी अपील की कि अधिक गर्मी में लगातार कार्य न करें तथा बीच-बीच में विश्राम अवश्य करें। उन्होंने कहा कि बच्चों व पालतू जानवरों को धूप में खड़े वाहनों में न छोड़े, क्योंकि इससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। आकाशीय बिजली से होने वाली घटनाओं को लेकर डीएम ने ग्राम प्रधानों, पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों से पंचायत भवनों, विद्यालयों एवं सार्वजनिक भवनों पर लाइटनिंग अरेस्टर लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, जिससे आकाशीय बिजली से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए पंचायत निधि से भी व्यवस्था की जा सकती है।
डीएम ने सभी तहसील एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि आकाशीय बिजली अथवा प्राकृतिक आपदा से जनहानि, पशुहानि या मकान क्षति की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचें। शासन की मंशा के अनुरूप त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि राहत वितरण की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी कराई जाए। उन्होंने जनपद की राप्ती, घाघरा एवं सरयू नदियों में बढ़ती डूबने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से गहरे पानी में न जाने की अपील की। ग्राम प्रधानों एवं संबंधित अधिकारियों को नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने का निर्देश दिया, ताकि लोगों को सुरक्षित दूरी की जानकारी मिल सके और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
डीएम ने कहा कि तेज आंधी-तूफान के दौरान कच्चे एवं जर्जर मकानों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को ऐसे परिवारों की सूची तैयार कर शासन की योजनाओं से लाभान्वित कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनपद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा किसी भी आपात स्थिति में आमजन की सहायता के लिए तत्पर रहेगा।
उधर, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार की गर्मी आने वाले दिनों में और खतरनाक रूप ले सकती है। विशेषज्ञों ने 2026 में सुपर एल नीनो बनने की आशंका जताई है। एल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक मौसमी प्रक्रिया है, जो दुनिया भर के तापमान और बारिश के पैटर्न को प्रभावित करती है। जब समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, तो इसका असर भारत के मानसून और गर्मी दोनों पर पड़ता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर इस बार सुपर एल नीनो की स्थिति बनी तो यह पिछले डेढ़ सौ वर्षों की सबसे गंभीर मौसमी घटनाओं में शामिल हो सकती है। इसके कारण देश के बड़े हिस्से में अत्यधिक तापमान, कम बारिश और लंबी हीटवेव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने में सावधानी बरतने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
