• राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जारी की नियुक्ति अधिसूचना, चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और एक वरिष्ठ अधिवक्ता को मिली सर्वोच्च न्यायालय में जिम्मेदारी


नई दिल्ली : देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था को सोमवार को नई ऊर्जा और मजबूती मिली, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पांच प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञों को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की। इन नियुक्तियों में चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के साथ एक वरिष्ठ अधिवक्ता को भी शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों से शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति मिलेगी और न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।


संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति ने यह नियुक्तियां की हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।


इनके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती वेंकिता सुब्रमणि मोहना को भी सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति मिली है। न्यायपालिका में उनके लंबे अनुभव और विधिक विशेषज्ञता को देखते हुए उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली अपने-अपने उच्च न्यायालयों में विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रशासन में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं। अब देश की सर्वोच्च अदालत में उनकी भूमिका और अधिक व्यापक होगी।


कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक क्षमता में वृद्धि होगी। शीर्ष अदालत में बढ़ते मामलों और जटिल संवैधानिक प्रश्नों के बीच अनुभवी न्यायाधीशों की मौजूदगी न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित हो सकती है।