अब सप्ताह में दो दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी सुनवाई, अदालत ने कार पूलिंग और डिजिटल कार्यशैली को बढ़ावा देने की दिशा में भी उठाया बड़ा कदम
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब सुप्रीम कोर्ट में सप्ताह के दो दिन अधिकतर मामलों की सुनवाई वर्चुअल माध्यम से की जाएगी। सोमवार और शुक्रवार को जज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामलों की सुनवाई करेंगे, जबकि सप्ताह के बाकी तीन दिन अदालत की कार्यवाही हाइब्रिड मोड में संचालित होगी।
नई व्यवस्था के अनुसार मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को वकीलों और पक्षकारों को दोनों विकल्प मिलेंगे। वे चाहें तो अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया को अधिक लचीला और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केवल सुनवाई की प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए कार पूलिंग को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। न्यायपालिका के इस कदम को ट्रैफिक कम करने, प्रदूषण घटाने और अनावश्यक ईंधन खपत रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस फैसले को ऐसे समय में लागू किया गया है जब देशभर में डिजिटल कार्यशैली और वर्क फ्रॉम होम मॉडल पर लगातार जोर दिया जा रहा है। हाल के महीनों में कई सरकारी और निजी संस्थानों ने तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना शुरू किया है। इससे पहले त्रिपुरा सरकार भी अपने यहां आधे कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू कर चुकी है।
इधर, देश में ईंधन बचत को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों, राज्य सरकारों और विभिन्न संस्थानों से जहां संभव हो वहां यात्रा कम करने और ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया था ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो सके।
ऊर्जा संकट को लेकर वैश्विक स्तर पर भी चिंता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल आपूर्ति से जुड़े तनाव के कारण कई देशों में ईंधन प्रबंधन को लेकर नए कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक कार्य संस्कृति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
