रेलवे ने नए प्रतीक चिन्ह को दी मंजूरी, अब लोगो में दिखाई देंगे 18 सितारे, साउथ कोस्ट रेलवे जोन के गठन के साथ 1 जून से पूरे देश में लागू होगा नया डिजाइन
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
भारतीय रेलवे अपनी पहचान से जुड़े सबसे बड़े बदलावों में से एक करने जा रहा है। दशकों से इस्तेमाल हो रहे रेलवे के लोगो में अब परिवर्तन किया जाएगा। रेलवे मंत्रालय की ओर से नए और संशोधित लोगो को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव के बाद रेलवे के प्रतीक चिन्ह में अब 17 की जगह 18 सितारे दिखाई देंगे।
रेलवे के लोगो में जोड़ा गया नया सितारा हाल ही में बने नए रेलवे जोन साउथ कोस्ट रेलवे का प्रतीक माना जा रहा है। रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनल रेलवे, प्रोडक्शन यूनिट, सार्वजनिक उपक्रमों और प्रशिक्षण संस्थानों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नए 18 सितारों वाले लोगो को 1 जून से पूरे देश में आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह फैसला रेलवे स्थापना और सुधार निदेशालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना के बाद लिया गया है। इसके साथ ही साउथ कोस्ट रेलवे जोन भी पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाएगा। नया जोन विशाखापट्टनम को मुख्यालय बनाकर काम करेगा और इसे आंध्र प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि माना जा रहा है।
दरअसल आंध्र प्रदेश में लंबे समय से अलग रेलवे जोन की मांग की जा रही थी। राज्य पुनर्गठन के बाद यह मांग और तेज हुई थी। अब सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रेल प्रशासन और अधिक मजबूत होगा तथा ट्रेनों के संचालन और प्रबंधन में सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही क्षेत्र में आधारभूत संरचना और विकास कार्यों को भी गति मिलने की संभावना है।
नए रेलवे जोन के तहत साउथ सेंट्रल रेलवे के विजयवाड़ा, गुंटूर और गुंतकल डिवीजन को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा ईस्ट कोस्ट रेलवे के पुराने वाल्टेयर डिवीजन का पुनर्गठन कर विशाखापट्टनम डिवीजन को भी इसमें जोड़ा गया है। कुछ हिस्सों को रायगड़ा डिवीजन के साथ समायोजित किया गया है।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अंतिम मंजूरी के बाद अब सभी रेलवे संस्थानों को अपने आधिकारिक कामकाज में नए लोगो का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। आने वाले समय में रेलवे की सरकारी चिट्ठियों, स्टेशनरी, स्टेशन साइनबोर्ड, प्रकाशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और विज्ञापनों में इसी नए 18 सितारों वाले प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल किया जाएगा।
रेलवे से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल लोगो तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय रेलवे के विस्तार और प्रशासनिक पुनर्गठन का भी प्रतीक माना जाएगा।
