दक्षिण 24 परगना के दौरे के दौरान तृणमूल नेता का काफिला कई जगह प्रदर्शनकारियों से घिर गया, घटनाक्रम के बाद तृणमूल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं

West Bengal : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद जारी राजनीतिक तनाव के बीच शनिवार को एक नया विवाद सामने आया। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी जब चुनावोत्तर हिंसा से प्रभावित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने दक्षिण 24 परगना पहुंचे तो उन्हें कई स्थानों पर तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण पूरे इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया।

जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी का दौरा उन परिवारों से मुलाकात के लिए निर्धारित था, जिनके परिजन चुनाव परिणामों के बाद हुई हिंसक घटनाओं में प्रभावित हुए थे। हालांकि यात्रा के दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने उनका विरोध किया। रास्ते में काले झंडे दिखाए गए और विभिन्न स्थानों पर नारेबाजी भी की गई। कुछ इलाकों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

सोनारपुर क्षेत्र में प्रवेश के दौरान विरोध और अधिक मुखर हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क किनारे एकत्र होकर अपना विरोध दर्ज कराया। राजनीतिक तनाव के बीच सुरक्षा घेरे में अभिषेक बनर्जी अपने निर्धारित कार्यक्रम को जारी रखते हुए प्रभावित परिवारों तक पहुंचे और उनसे मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने तथा कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

दौरे के दौरान अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद कई क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिशोध की घटनाएं सामने आई हैं और प्रभावित कार्यकर्ताओं के परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में पार्टी का दायित्व है कि वह अपने कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के साथ खड़ी रहे।

इस बीच विपक्षी दलों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनावी हिंसा की घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों तक पहुंचने में काफी समय लगा। विपक्ष ने इसे राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए तृणमूल नेतृत्व की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह दौरा संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों के प्रति एकजुटता जताने का प्रयास है।

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनके खिलाफ हुई गतिविधियां सुनियोजित थीं और पूरे घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले को कानूनी स्तर पर भी उठाया जाएगा। वहीं पार्टी नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई और जिम्मेदार एजेंसियों से जवाब मांगा।

दूसरी ओर, इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चुनावोत्तर हिंसा और राजनीतिक ध्रुवीकरण के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।