अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को महान नेता बताते हुए उनके साथ अपने रिश्तों की खुलकर तारीफ की


बीजिंग में आयोजित अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच महत्वपूर्ण वार्ता शुरू हुई। दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्तियों के नेताओं की इस मुलाकात को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कई बड़े विवादित मुद्दों पर किसी बड़े समझौते की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।


वार्ता की शुरुआत में ट्रंप ने शी चिनफिंग के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को बेहद सकारात्मक बताते हुए कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच कोई मुश्किल स्थिति बनी, तब बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई। उन्होंने शी को “महान नेता” बताते हुए कहा कि उनके साथ दोस्ती और संवाद उनके लिए सम्मान की बात है। ट्रंप ने कहा कि दोनों देश मिलकर भविष्य में नए अवसर और बेहतर संबंध तैयार कर सकते हैं।


अमेरिकी राष्ट्रपति इस यात्रा के दौरान कई बड़े उद्योगपतियों को भी अपने साथ बीजिंग लेकर पहुंचे हैं। सम्मेलन में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और टेस्ला के एलन मस्क समेत कई प्रमुख अमेरिकी कारोबारी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि ट्रंप का मुख्य फोकस व्यापारिक समझौतों, चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद और यात्री विमानों से जुड़े सौदों पर है।


हालांकि दोनों देशों के बीच कई गंभीर मतभेद अब भी कायम हैं। व्यापार युद्ध, ताइवान को अमेरिकी समर्थन, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और फेंटेनाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को लेकर अमेरिका की नाराजगी जैसे मुद्दों ने पिछले वर्षों में रिश्तों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद दोनों पक्ष बातचीत के जरिए रिश्तों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।


दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और चीन के बीच मतभेदों का खुलकर जिक्र नहीं किया। हालांकि माना जा रहा है कि बंद कमरे में हुई बातचीत में यह मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा रहा होगा।


चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने संबोधन में टकराव की बजाय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय ऐसे बदलावों के दौर से गुजर रही है, जैसा पिछले सौ वर्षों में नहीं देखा गया। शी ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता और तनाव के माहौल में चीन और अमेरिका के स्थिर संबंध पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी हैं।


शी चिनफिंग ने अपने भाषण में “थ्यूसिडाइड्स ट्रैप” का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि क्या चीन और अमेरिका प्रतिस्पर्धा और टकराव से ऊपर उठकर प्रमुख शक्तियों के रिश्तों का नया उदाहरण पेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सामने यह जिम्मेदारी है कि वे वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करें और दुनिया को अधिक स्थिरता दें।


सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान ताइवान को अमेरिकी हथियार आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन पहले ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दे चुका है, जिसे लेकर चीन लगातार विरोध जताता रहा है।


दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रिश्तों में स्थिरता बनाए रखना बताया जा रहा है। हालांकि किसी बड़े समझौते की संभावना सीमित मानी जा रही है, लेकिन वैश्विक तनाव के दौर में अमेरिका और चीन के बीच संवाद जारी रहना ही बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।