• तंबाकू उत्पादों की निगरानी और नियामक कार्रवाई को मजबूत बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की गई


नई दिल्ली : देश में युवाओं को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोजित समारोह में तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान एप्लिकेशन के पायलट संस्करण का शुभारंभ किया।


यह एप्लिकेशन देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में तंबाकू निषेध संबंधी दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसके माध्यम से शिक्षण संस्थान स्वयं अपने परिसर की स्थिति का आकलन कर सकेंगे और तंबाकू मुक्त मानकों के अनुपालन की रिपोर्ट भी दर्ज कर सकेंगे। संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर निगरानी, जागरूकता गतिविधियों का संचालन और परिसर में तंबाकू मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को और व्यवस्थित बनाया जाएगा।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यक्रम अधिकारियों को एक समान निगरानी एवं मूल्यांकन व्यवस्था उपलब्ध होगी। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और बच्चों तथा किशोरों के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। प्रारंभिक चरण में राजस्थान, महाराष्ट्र और मेघालय में इसका परीक्षण किया जाएगा। इन राज्यों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर भविष्य में इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है।


इस अवसर पर मंत्रालय ने तंबाकू उत्पादों के नमूनों के संग्रहण और परीक्षण से संबंधित नई मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की। इसका उद्देश्य तंबाकू उत्पादों की गुणवत्ता जांच, नियामक अनुपालन और प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। नई प्रक्रिया के तहत नमूनों के संग्रह, भंडारण, परिवहन और परीक्षण के लिए एक समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बन सके।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम निकोटीन और तंबाकू की लत के पीछे छिपे आकर्षण को उजागर करने और उससे मुकाबला करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि तंबाकू और निकोटीन उत्पादों को अक्सर इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि वे युवाओं को आकर्षित करें।


आकर्षक पैकेजिंग, विभिन्न फ्लेवर, सोशल मीडिया प्रचार और डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है, जिससे उनके मन में इन उत्पादों के प्रति गलत धारणा विकसित हो सकती है।


उन्होंने कहा कि युवाओं को जागरूक बनाना और उन्हें तंबाकू के दुष्प्रभावों से अवगत कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। सरकार इसी उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रही है। उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, डेंटल कॉलेजों, आयुष संस्थानों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में दो हजार से अधिक तंबाकू त्याग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां लोगों को तंबाकू छोड़ने में सहायता प्रदान की जाती है।


स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, श्वसन संबंधी बीमारियों और कई अन्य गैर-संचारी रोगों का प्रमुख कारण है। इसलिए तंबाकू नियंत्रण केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय अभियान है।

कार्यक्रम के दौरान तंबाकू निषेध की शपथ भी दिलाई गई और सभी प्रतिभागियों ने तंबाकू मुक्त भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।


जागरूकता अभियान के तहत स्कूली विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर तंबाकू और निकोटीन की लत के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से लोगों के सामने रखा। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और तंबाकू नियंत्रण से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।