देशभर में शुरू होगा एकता का महाअभियान, कोलकाता से 24 जून को होगी शुरुआत, देशभर के लगभग 3,000 युवा होंगे शामिल
नई दिल्ली : देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू करने जा रही है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग द्वारा संचालित 'माई भारत' अभियान के तहत देशभर में 'वंदे मातरम शिविर' आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रभक्ति, संवैधानिक मूल्यों, नागरिक जिम्मेदारियों और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से होगी, जहां 24 से 30 जून तक पहला वंदे मातरम शिविर आयोजित किया जाएगा। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाला यह शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना और युवा शक्ति को एक मंच पर लाने का प्रयास माना जा रहा है।
सात दिनों तक चलने वाले इन आवासीय शिविरों को इस तरह तैयार किया गया है कि युवा भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं को नजदीक से समझ सकें। साथ ही उनमें सांस्कृतिक आत्मविश्वास, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूकता भी विकसित हो। यह पहल विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के अनुरूप ऐसे युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जो जागरूक, जिम्मेदार और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाली हो।
वंदे मातरम शिविरों की मूल भावना भारत माता के प्रति सम्मान और देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, संस्कृतियों तथा सामाजिक वर्गों के बीच भावनात्मक एकीकरण को मजबूत करना है। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नागरिक भागीदारी, नेतृत्व विकास, डिजिटल साक्षरता, सामुदायिक सेवा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे केवल दर्शक नहीं बल्कि बदलाव के सक्रिय भागीदार बन सकें।
योजना के तहत चयनित जिलों में कुल 20 शिविर लगाए जाएंगे। प्रत्येक शिविर में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 150 युवाओं को भाग लेने का अवसर मिलेगा। हर शिविर में छह अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जबकि पूर्वोत्तर भारत के युवाओं की भागीदारी अनिवार्य रखी गई है। महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की न्यूनतम 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रकार देशभर के लगभग 3,000 युवा इस अभियान से सीधे जुड़ेंगे।
शिविरों में युवाओं को वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका से अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा संविधान, मौलिक कर्तव्यों, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नेतृत्व विकास और सामुदायिक एकजुटता जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। प्रतिभागियों को विभिन्न राज्यों की भाषाओं, भोजन, खेल और सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना और मजबूत हो सके।
कार्यक्रम के दौरान ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण, राष्ट्र प्रथम संवाद, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिताएं, नेतृत्व कार्यशालाएं और केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं पर परिचर्चाएं भी आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं में संवाद, आत्मविश्वास, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।
मंत्रालय का मानना है कि भारत के युवाओं की ऊर्जा, आदर्शवाद और रचनात्मकता देश की सबसे बड़ी ताकत है। वंदे मातरम शिविर इसी शक्ति को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास हैं, ताकि आने वाले वर्षों में देश को ऐसे युवा नेतृत्व मिल सके जो राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और समावेशी विकास के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
