भोटे कोशी से त्रिशूली तक मलबे और पानी ने मचाई तबाही, सैकड़ों अब भी लापता, तीसरे दिन भी नदी किनारे मिल रहे शव

नेपाल में भोटे कोशी नदी की विनाशकारी बाढ़। खबर है कि नेपाल में भोटे कोशी नदी से शुरू हुई विनाशकारी बाढ़ के तीसरे दिन शुक्रवार को मौतों का आंकड़ा बढ़कर 469 तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं और नदी के बहाव के साथ काफी दूर तक पहुंचे शव लगातार बरामद किए जा रहे हैं। बुधवार, 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टानों के विशाल हिस्से के ढहने के बाद पानी, बर्फ, पत्थर और मलबे का सैलाब भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में उतरा था। इसने रास्ते में आने वाली बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को तबाह कर दिया। शुक्रवार की सुबह तक नेपाल पुलिस ने 469 लोगों की मौत की पुष्टि की है।

आपदा की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि शव घटनास्थल से काफी दूर निचले इलाकों तक पहुंच रहे हैं। चितवन, तनहूं, नवलपरासी और दूसरे जिलों में लगातार शव और मानव अवशेष बरामद हो रहे हैं। चितवन में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अस्पतालों के शवगृहों की क्षमता कम पड़ने लगी और भरतपुर में शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्थायी केंद्र तैयार करना पड़ा। गुरुवार सुबह तक अकेले चितवन क्षेत्र में 137 शव बरामद हो चुके थे।

बाढ़ का सबसे बड़ा प्रहार रासुवा और नुवाकोट क्षेत्र पर पड़ा। पानी और मलबे की विशाल धारा ने मकानों, वाहनों और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। कई सड़कें और पुल बह गए, जिससे दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक इस आपदा में 35 मोटर पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

सबसे बड़ी चिंता उन सैकड़ों लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं। कई लोग कैलाश मानसरोवर और गोसाईंकुंड की यात्रा पर निकले थे। नेपाल की ओर से जारी आंकड़ों में भारतीय, अमेरिकी, मलेशियाई, यूक्रेनी, ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई और कई अन्य देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत के विदेश मंत्रालय के गुरुवार देर शाम तक के आकलन में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े विभिन्न समूह भी शामिल हैं। हालांकि अलग-अलग नेपाली एजेंसियों के आंकड़ों में भारतीयों की संख्या अलग है, क्योंकि पर्यटन बोर्ड की सूची मुख्य रूप से पर्यटकों पर आधारित है।

इस बीच भारतीयों के बचाव अभियान में महत्वपूर्ण सफलता भी मिली है। त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु के 21 यात्रियों को भी बचाया गया। इस तरह विदेश मंत्रालय के गुरुवार रात के अपडेट तक कम से कम 84 भारतीयों के सुरक्षित बचाए जाने की पुष्टि हुई थी।

त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना ने बड़ा अभियान चलाया। करीब 350 मजदूरों और कर्मचारियों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला गया। परियोजना में भारतीय मजदूर भी काम कर रहे थे। हेलीकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं।

इस महाआपदा के कारण को लेकर भी अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। शुरुआती दौर में कुछ भूकंपीय गतिविधियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण में सामने आया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के साथ बर्फ और चट्टानों का विशाल हिस्सा ढह गया था। इससे ल्हेंदे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए अवरुद्ध हुआ और प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बनी। इसके टूटने पर पानी, चट्टान, बर्फ और मलबे का विशाल सैलाब भोटे कोशी और फिर त्रिशूली नदी में उतर गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भी शुरुआती भूकंपीय संकेत को बाद में ग्लेशियर ढहने और मलबे के प्रवाह से जुड़ा बताया। हालांकि गुरुवार को नेपाल में अलग से 3.2 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज हुआ।

नेपाल के सामने अब दूसरी बाढ़ का खतरा भी खड़ा हो गया है। भोटे कोशी नदी तंत्र के स्रोत क्षेत्र के पास मलबे के कारण एक नई झील बन गई है। चीनी अधिकारियों के शुरुआती अनुमान के अनुसार इसमें करीब 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था और अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घनमीटर अतिरिक्त पानी पहुंचने की आशंका जताई गई। प्राकृतिक अवरोध टूटने की स्थिति में दोबारा तेज सैलाब आने का खतरा है। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने भोटे कोशी और त्रिशूली के किनारे रहने वालों के साथ बचाव दलों को भी सतर्क रहने को कहा है।

संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल की मदद में तेजी से जुटा है। भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से पहले करीब 10 टन राहत और चिकित्सा सामग्री भेजी गई। इसके बाद सी-17 ग्लोबमास्टर से 37.5 टन अतिरिक्त सहायता काठमांडू पहुंचाई गई। इस तरह भारत अब तक 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, दवाइयां और खाद्य सामग्री शामिल हैं। भारत ने जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता के लिए भी संसाधनों को तैयार रखा है।

नेपाल ने हालांकि विदेशी बचाव दलों को फिलहाल अपने यहां उतारने से इनकार किया है। नेपाल सरकार का कहना है कि उसके सुरक्षा बल खोज एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं। भारत सहित कई देशों ने बचाव दल भेजने की पेशकश की थी। नेपाल ने मानवीय और आर्थिक सहायता स्वीकार करने की बात कही है।