नेपाल से तस्करी की आशंका, विशेषज्ञों की जांच से प्रजाति की होगी पहचान, संरक्षित प्रजाति मिलने पर बढ़ सकती है मामले की गंभीरता

बिहार। पूर्वी चंपारण से खबर है कि भारत-नेपाल सीमा से होकर बहने वाली सरिसवा नदी सोमवार को एक अनोखी बरामदगी को लेकर चर्चा में आ गई। बॉर्डर पिलर संख्या 393 के समीप नदी किनारे करीब 15 से 20 किलो वजन का विशाल काले रंग का कछुआ दिखाई दिया तो स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। सीमा क्षेत्र में इतने बड़े कछुए के मिलने से उसके नेपाल की ओर से बहकर आने से लेकर संभावित तस्करी तक की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, अभी तस्करी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों ने नदी से बाहर निकले कछुए को देखने के बाद इसकी सूचना एसएसबी को दी। सूचना मिलते ही एसएसबी के जवान मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से कछुए को सुरक्षित बरामद कर लिया। एसएसबी ने कछुए को तुमड़िया टोला-भकुवा ब्रह्म स्थान स्थित अस्थायी कैंप में सुरक्षित रखा है। इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को भी दे दी गई है।

कछुआ जिस स्थान पर मिला है, वहां सरिसवा नदी भारत और नेपाल की सीमा के आसपास बहती है। इसी कारण यह सवाल उठ रहा है कि कछुआ प्राकृतिक रूप से नदी की धारा के साथ यहां पहुंचा या इसे सीमा पार से लाने का प्रयास किया जा रहा था। तस्करी के दौरान इसके नदी में छूटने या गिरने की आशंका भी स्थानीय स्तर पर जताई जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

 कछुए के काले रंग और असामान्य आकार को लेकर भी क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे नेपाल की काली गंडकी नदी में मिलने वाले शालिग्राम से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। शालिग्राम जीवाश्मीकृत अमोनाइट से जुड़े पत्थर हैं, जबकि यहां बरामद जीव एक कछुआ है। अब विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद कछुआ किस प्रजाति का है। यदि जांच में यह किसी संरक्षित प्रजाति का पाया जाता है तो मामला और गंभीर हो सकता है। भारत में कछुओं की कई प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित हैं और उनकी अवैध खरीद-बिक्री या तस्करी दंडनीय है।

 कछुओं की अवैध तस्करी के मामले पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आते रहे हैं। इनका इस्तेमाल अवैध पालतू जीव बाजार, मांस, पारंपरिक चिकित्सा और कुछ धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मामलों में होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब इतने बड़े कछुए की बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल एसएसबी ने कछुए को सुरक्षित रखकर वरीय अधिकारियों को सूचना दे दी है। अब विशेषज्ञ जांच और आगे की पड़ताल से ही साफ होगा कि करीब 20 किलो का यह काला कछुआ सरिसवा नदी तक प्राकृतिक रूप से पहुंचा या इसके पीछे वन्यजीव तस्करी की कोई कड़ी जुड़ी है।