मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति संकट की आशंकाओं के बीच सरकार ने एहतियाती कदम उठाया है

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति व्यवस्था पर मंडरा रहे संकट के बीच केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी है। अब ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता का ईंधन केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट या थोक वितरण केंद्रों से ही लेना होगा।

केंद्र सरकार का मानना है कि यदि समय रहते नियंत्रणात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सरकार ने खुदरा बिक्री केंद्रों से होने वाली थोक खरीद पर अंकुश लगाने का निर्णय लिया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल आदेश, 2026’ जारी कर तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके तहत रिटेल आउटलेट से होने वाली थोक खरीद पर रोक लगाई गई है। यह व्यवस्था प्रारंभिक तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।

सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री परिवहन व्यवस्था और तेल की उपलब्धता पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में देश के भीतर ईंधन का संतुलन बनाए रखना और आम नागरिकों के लिए पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

सरकार के अनुसार देश के कुछ क्षेत्रों में हाल के दिनों में विशेष रूप से डीजल की मांग में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण खुदरा और थोक कीमतों के बीच बढ़ा हुआ अंतर है। दिल्ली में जहां खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत लगभग 95.20 रुपये प्रति लीटर है, वहीं थोक बाजार में इसकी कीमत करीब 134.50 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है। यह अंतर इसलिए पैदा हुआ क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने वैश्विक संकट का सीधा असर आम लोगों पर न पड़े, इसके लिए खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखा।

कीमतों में इस बड़े अंतर का लाभ उठाने के लिए कई बड़े खरीदारों ने थोक वितरकों के बजाय सीधे पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू कर दिया था। सरकार को आशंका थी कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो आम जनता के लिए आरक्षित स्टॉक पर दबाव बढ़ जाएगा और कई क्षेत्रों में ईंधन की किल्लत पैदा हो सकती है। इससे परिवहन, आपूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना थी।

नई व्यवस्था के तहत बड़े उपभोक्ताओं को अब अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों अथवा निर्धारित थोक बिक्री केंद्रों के माध्यम से ही ईंधन प्राप्त करना होगा। खुदरा पेट्रोल पंपों से डीजल की बिक्री केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही की जा सकेगी।

सरकार ने एक और महत्वपूर्ण सीमा निर्धारित करते हुए कहा है कि कोई भी ग्राहक अथवा वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीद सकेगा। इसके साथ ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इस प्रकार खरीदे गए डीजल को किसी भी स्थिति में आगे बेचने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

केंद्र सरकार ने नए नियमों को सख्ती से लागू कराने की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और राज्य सरकारों को सौंपी है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे जमाखोरी, कालाबाजारी, अवैध खरीद-फरोख्त तथा ईंधन की हेराफेरी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।