• चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को लाखों रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला, व्यावसायिक क्षेत्रों को भी योजना में किया गया शामिल


बिहार : देशभर में बढ़ते प्रदूषण, महंगे होते पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता बन चुके हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारें भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। बिहार सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा देने के लिए घोषित नई प्रोत्साहन योजनाएं इसी बदलते दौर का संकेत हैं। यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में बिहार स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।


किसी भी राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार की सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता होती है। लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले यह जानना चाहते हैं कि उन्हें चार्जिंग की सुविधा कहां और कितनी आसानी से मिलेगी। बिहार सरकार ने इसी आवश्यकता को समझते हुए पहली बार हाउसिंग सोसाइटियों को भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में बड़ी संख्या में लोग अपने आवासीय परिसरों में ही वाहनों को चार्ज करना चाहेंगे। यदि सोसाइटियों में चार्जिंग की सुविधा विकसित होती है तो इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में लोगों की झिझक काफी हद तक कम हो सकती है।


सरकार ने चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 75 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है। योजना के तहत पहले 900 धीमी और मध्यम गति वाले एसी चार्जरों की स्थापना पर उपकरण लागत का 75 प्रतिशत और अधिष्ठापन व्यय के लिए सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार पहले 450 तेज गति वाले एसी चार्जरों तथा 450 अन्य श्रेणी के चार्जरों को भी विशेष सहायता मिलेगी। वहीं पहले 90 सीसीएस फास्ट चार्जरों पर अधिकतम 15 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने की दिशा में ठोस निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।


चार्जिंग स्टेशन केवल हाउसिंग सोसाइटियों तक सीमित नहीं रहेंगे। पेट्रोल पंप, होटल, बस टर्मिनल, व्यावसायिक क्षेत्र और सार्वजनिक पार्किंग स्थल भी इस योजना का हिस्सा बनाए जा रहे हैं। इससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में चार्जिंग सुविधाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार हो सकता है, जो इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा।


सरकार ने वाहन खरीदने वालों के लिए भी आकर्षक प्रोत्साहन की व्यवस्था की है। विशेष रूप से ई-तिपहिया वाहनों को बढ़ावा देकर पारंपरिक जुगाड़ वाहनों का विकल्प विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। सामान्य वर्ग के खरीदारों को ई-तिपहिया वाहन खरीदने पर 50 हजार रुपये तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग को 60 हजार रुपये तक का अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त महिलाओं और एससी-एसटी वर्ग के लोगों को इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर 12 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह राशि 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है। महिलाओं को इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन खरीदने पर एक लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी इस योजना को विशेष बनाती है।


ई-वाहनों पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे वाहन खरीदने की कुल लागत कम होगी और लोग पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं। यह केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक प्रयास है।


हालांकि किसी भी योजना की सफलता उसकी घोषणा से नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन से तय होती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रोत्साहन राशि समय पर मिले, चार्जिंग स्टेशन निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापित हों और उनका नियमित संचालन भी सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति की मजबूती, तकनीकी सहायता और जनजागरूकता पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।


बिहार की यह पहल केवल परिवहन व्यवस्था में बदलाव का प्रयास नहीं है, बल्कि हरित विकास, ऊर्जा बचत और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक दीर्घकालिक निवेश भी है। यदि योजनाएं सही तरीके से लागू हुईं तो आने वाले वर्षों में राज्य न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में आगे बढ़ेगा, बल्कि सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।