स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित जिलों में विशेष निगरानी शुरू की
BIHAR: गर्मी और उमस बढ़ने के साथ ही बिहार में एक बार फिर चमकी बुखार यानी एईएस का खतरा गहराने लगा है। हर साल मासूम बच्चों की जिंदगी पर संकट बनकर टूटने वाली इस बीमारी को लेकर इस बार स्वास्थ्य विभाग पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में विशेष निगरानी, अस्पतालों में अतिरिक्त बेड, मुफ्त इलाज और त्वरित एम्बुलेंस सुविधा की व्यापक तैयारी शुरू कर दी है ताकि किसी भी स्थिति में बच्चों को समय पर इलाज मिल सके।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि राज्य सरकार एईएस और चमकी बुखार की रोकथाम एवं उपचार को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और मरीजों को त्वरित एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
सबसे अधिक प्रभावित 15 जिलों में 10 बेड वाले पीआईसीयू वार्ड स्थापित किए गए हैं। वहीं मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच में 100 बेड का अत्याधुनिक पीआईसीयू वार्ड तैयार किया गया है, जहां गंभीर बच्चों का विशेष इलाज किया जाएगा। इसके अलावा अन्य जिलों के जिला अस्पतालों में पांच और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो बेड एईएस मरीजों के लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर समेत कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों से लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक विशेष नोडल पदाधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि मरीजों की पहचान और इलाज में किसी तरह की देरी न हो।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अस्पतालों में जरूरी दवाओं, जांच सुविधाओं और चिकित्सकीय उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि मरीजों को तुरंत बेहतर उपचार मिल सके। सभी सरकारी अस्पतालों में दवाएं और जांच सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके साथ ही एम्बुलेंस सेवा को भी मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। चिन्हित प्रभावित जिलों में यदि कोई परिजन अपने निजी वाहन से बच्चे को अस्पताल लेकर आता है, तो उसे नियमानुसार तत्काल नगद सहायता देने की भी व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य विभाग जापानी इंसेफेलाइटिस यानी जेई के नियमित मुफ्त टीकाकरण अभियान को भी लगातार चला रहा है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध कराई गई है ताकि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग भी विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकें। आशा और आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से गांव स्तर पर बच्चों की निगरानी की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि विभाग व्यापक जागरूकता अभियान भी चला रहा है। लोगों को समझाया जा रहा है कि बच्चों को तेज धूप से बचाएं, रात में भूखा न सुलाएं, पर्याप्त पानी और ओआरएस दें तथा झाड़-फूंक में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में तेज बुखार, कमजोरी, बेहोशी या झटके जैसे लक्षण दिखते ही नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत संपर्क करें।
हर साल गर्मी के मौसम में चमकी बुखार बिहार के कई परिवारों के लिए डर और चिंता का कारण बन जाता है। ऐसे में इस बार स्वास्थ्य विभाग की तैयारी और सतर्कता से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
