• मानसा में एक साल से कार्रवाई का इंतजार, पीड़ित ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार


पंजाब : मानसा जिले के एक छोटे से गांव से उठी यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है जहां एक गरीब की आवाज दब जाती है और ताकतवरों का दबदबा हावी हो जाता है। गांव भैणीबाघा में एक चरवाहे के साथ हुई मारपीट, उसका रास्ता छीन लेना और उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित करना-इन सबके बावजूद पुलिस की चुप्पी अब पूरे मामले को और गंभीर बना रही है।


पीड़ित जैला सिंह, जो मजबी सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, ने आरोप लगाया है कि गांव के प्रभावशाली लोगों ने उनके घर तक जाने वाले रास्ते पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर उनका रास्ता था, उसे जबरदस्ती खेतों में मिला लिया गया, जिससे उनके घर आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन्हें पकड़कर बेरहमी से पीटा।


घटना के बाद जैला सिंह को उनके परिवार ने सिविल अस्पताल मानसा में भर्ती कराया। उन्होंने ठुठियावाली चौकी में शिकायत भी दर्ज कराई, जहां मेडिकल लीगल रिपोर्ट भी तैयार हुई, लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं, पीड़ित का कहना है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय आरोपियों का पक्ष लिया, जिससे उनका भरोसा और भी कमजोर हुआ।


जैला सिंह ने बताया कि उन्होंने यह जमीन ठेकेदार गुरदीप सिंह से खरीदी थी, जिसमें करीब 20 फीट चौड़ा पक्का रास्ता छोड़ा गया था। लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इस रास्ते को भी अपने खेत में शामिल कर लिया। इस विवाद के चलते न केवल उनका रास्ता छीन लिया गया, बल्कि उन्हें अपमानित भी किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और गाली-गलौज की गई।


पीड़ित ने जिन लोगों पर आरोप लगाया है, उनमें जसविंदर सिंह, लाली सिंह, अमरजीत कौर और गुरप्रीत कौर के नाम शामिल हैं। जैला सिंह का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके साथ ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले भी इन लोगों ने उस रास्ते पर जहरीला स्प्रे कर दिया था, जहां से वे अपनी बकरियां चराते हुए गुजरते थे। इस घटना में उनकी 12 बकरियों की मौत हो गई थी। उस समय भी उन्होंने पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित का आरोप है कि अगर पहले की घटना में पुलिस ने सख्ती दिखाई होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। लगातार हो रही अनदेखी और कार्रवाई के अभाव ने आरोपियों के हौसले और बढ़ा दिए हैं, जिसका नतीजा उन्हें दोबारा मारपीट के रूप में झेलना पड़ा।


अब जैला सिंह ने एसएसपी मानसा को पत्र लिखकर पूरे मामले में न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उनके साथ हुई मारपीट और जातिसूचक अपमान को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ उनका हक और सुरक्षित जीवन चाहिए, लेकिन इसके लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।


यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि उस सामाजिक और प्रशासनिक तंत्र की सच्चाई को उजागर करता है, जहां कमजोर वर्ग के लोगों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार आवाज उठानी पड़ती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कदम उठाता है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।