भोटेकोशी में अचानक उमड़े सैलाब से पुल, सड़क और मकान तबाह। 105 भारतीय समेत सैकड़ों यात्रियों से संपर्क टूटने की सूचना
नेपाल के उत्तरी हिस्से में बुधवार सुबह पहाड़ों से अचानक उतरे पानी ने कुछ ही समय में तबाही का ऐसा मंजर खड़ा कर दिया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी अचानक विकराल हो गई। तेज बहाव अपने साथ मकान, पुल, सड़कें और दूसरी संरचनाएं बहाता चला गया। रसुवा से शुरू हुई तबाही का असर नुवाकोट, धाडिंग और आगे के इलाकों तक पहुंचा है। अब इस जलप्रलय की आहट बिहार तक सुनाई दे रही है और गंडक नदी से जुड़े क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
इस आपदा में मृतकों की संख्या को लेकर बुधवार शाम तक अलग-अलग रिपोर्ट सामने आ रही थीं। कुछ रिपोर्टों में 95 लोगों की मौत की बात कही गई, जबकि नेपाल से प्रकाशित काठमांडू पोस्ट की शाम 6:20 बजे की अपडेट में 22 मौतों की पुष्टि की गई। मगर, यह तय है कि मृतकों की संख्या बड़ी हो सकती है।
इस बीच नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। बोर्ड के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 384 यात्रियों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय बताए गए हैं। 37 एनआरआई भी अलग से सूचीबद्ध हैं। पर्यटन बोर्ड ने साफ किया है कि यह प्रारंभिक सूची है और यात्रियों की वास्तविक स्थिति का ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से सत्यापन किया जा रहा है। इसलिए सूची में नाम होने का अर्थ किसी की मृत्यु की पुष्टि नहीं है।
लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्रियों की भी बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक ट्रैवल एजेंसी ने अपने कम से कम 59 भारतीय यात्रियों को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाला बताया है।


नेपाल के सुरक्षा बल भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पुलिस और सशस्त्र पुलिस के जवानों समेत कई सुरक्षाकर्मियों से संपर्क टूटने की सूचना है। इसके अलावा लांगटांग खोला हाइड्रोपावर परियोजना से जुड़े करीब 60 लोग और रसुवा कस्टम कार्यालय के 15 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। नेपाली सेना ने बुधवार शाम तक 88 लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी थी।
सबसे बड़ा सवाल है कि बिना स्थानीय स्तर पर असाधारण भारी बारिश के इतना विशाल सैलाब अचानक आया कैसे? शुरुआती घंटों में ग्लेशियर झील फटने यानी GLOF और तेजी से बर्फ पिघलने जैसी आशंकाएं सामने आई थीं। लेकिन बाद के प्रारंभिक तकनीकी आकलन में एक दूसरी तस्वीर उभरी है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण से जुड़ी जानकारी में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अस्थिर पहाड़ी चट्टानों के खिसकने और लेंडे नदी के अवरुद्ध होने के बाद अचानक पानी निकलने को संभावित कारण बताया गया है। नेपाल के विदेश मंत्री ने भूकंप के बाद बड़े भूस्खलन से नदी अवरुद्ध होने की बात भी कही है। लिहाजा बाढ़ का अंतिम वैज्ञानिक कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
भोटेकोशी का उफान आगे त्रिशूली नदी में पहुंचा और पानी ने रास्ते में कई बस्तियों तथा बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा सहित नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा नदी से दूर रहने को कहा है। खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि नदी अवरुद्ध होने वाले स्थान पर जमा पानी के पूरी तरह निकलने की पुष्टि नहीं हुई है।
बाढ़ ने नेपाल की बिजली व्यवस्था को भी बड़ा झटका दिया है। नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3A, त्रिशूली-3B हब के 220 केवी सबस्टेशन, त्रिशूली हाइड्रोपावर स्टेशन और देवीघाट हाइड्रोपावर स्टेशन समेत महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। सड़क संपर्क भी कई स्थानों पर टूट गया है और कई राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आपदा के बाद राष्ट्रीय स्तर पर राहत एवं बचाव तंत्र सक्रिय कर दिया है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के साथ मेडिकल टीम, रेडक्रॉस और अन्य एजेंसियों को राहत अभियान में लगाया गया है। उपलब्ध सरकारी और निजी हेलीकॉप्टरों को भी बचाव कार्य के लिए तैयार रखा गया। हालांकि खराब मौसम के कारण कई हेलीकॉप्टर उड़ानों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हुई।
इस आपदा के बीच भारत ने भी नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने की पेशकश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर जान-माल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की और राहत एवं बचाव में भारत के सहयोग का भरोसा दिया।
नेपाल में मची इस तबाही का असर बिहार पर पड़ने की आशंका को देखते हुए गंडक नदी से जुड़े क्षेत्रों में प्रशासन सतर्क है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से नदी के पास नहीं जाने, अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल नेपाल में जिंदगी बचाने की जंग जारी है और सैकड़ों लापता लोगों की तलाश हो रही है। वहीं बिहार की निगाहें नेपाल से मैदानों की ओर बढ़ रहे पानी पर टिकी हैं। पहाड़ों में अचानक उमड़ा पानी कितनी तेजी से नीचे पहुंचेगा और गंडक के जलस्तर पर उसका कितना असर पड़ेगा, आने वाले घंटे इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।