स्कूलों में सुरक्षित और प्रभावी स्वच्छता सुविधाओं तक छात्राओं की पहुंच बढ़ाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी

नई दिल्ली : किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, सुरक्षित सुविधाओं और सही जानकारी के अभाव से जूझना न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आर्थिक एवं कार्यक्रम संबंधी सहायता उपलब्ध करा रही है। सरकार का जोर केवल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों को मासिक धर्म से जुड़े सुरक्षित व्यवहार की जानकारी देने से लेकर इस्तेमाल किए गए उत्पादों के पर्यावरण अनुकूल निपटान तक की व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

सरकार के अनुसार, मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन ऐसा विषय है, जिसमें अकेले स्वास्थ्य मंत्रालय की भूमिका पर्याप्त नहीं है। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय जरूरी है। संबंधित विभाग अपने वैधानिक दायित्वों के अनुसार इस दिशा में काम करते हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं में मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखते हैं। निर्धारित मानदंडों के अनुरूप इन प्रस्तावों के आधार पर उन्हें योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय किशोरियों को केंद्र में रखते हुए मासिक धर्म स्वच्छता योजना भी चला रहा है। इसके तहत मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है। किशोरियों को सुरक्षित मासिक धर्म व्यवहार के बारे में परामर्श देने और इस्तेमाल किए गए सैनिटरी उत्पादों के सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल निपटान के बारे में जानकारी देने को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है।

मंत्रालय स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक मंचों के साथ अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मदद से लगातार जागरूकता कार्यक्रम संचालित करता है। सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों के अलावा डिजिटल माध्यमों और किशोरों के लिए संचालित कार्यक्रमों का इस्तेमाल भी मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

योजनाएं केवल लागू ही नहीं की जा रहीं, बल्कि उनकी प्रगति की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बहुस्तरीय व्यवस्था भी बनाई गई है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एनपीसीसी की बैठकों में निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में राज्यवार उपलब्धियों की समीक्षा की जाती है।

इसके अलावा वार्षिक साझा समीक्षा मिशन के माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में हुई प्रगति और प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों का स्वतंत्र आकलन किया जाता है। इससे योजनाओं के वास्तविक प्रभाव और क्रियान्वयन की स्थिति को समझने में मदद मिलती है।

स्कूली छात्राओं की मासिक धर्म स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने विभागों के माध्यम से मासिक धर्म स्वच्छता नीति को लागू करते हैं। इसका उद्देश्य स्कूलों में छात्राओं को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उपायों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

सरकार का प्रयास है कि मासिक धर्म को लेकर किशोरियों के बीच जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिसमें स्वास्थ्य केंद्र से लेकर समुदाय और स्कूल तक उन्हें आवश्यक स्वच्छता सुविधाएं, किफायती उत्पाद और सुरक्षित व्यवहार से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।