लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना, बढ़ता वजन और निष्क्रिय जीवनशैली बन रही परेशानी की बड़ी वजह
मुजफ्फरपुर : घंटों कुर्सी पर बैठे रहना हो या लगातार खड़े होकर काम करना, बढ़ता वजन हो या शरीर को पर्याप्त सक्रिय न रखना। आधुनिक जीवनशैली की ये आदतें अब नसों की सेहत पर भारी पड़ रही हैं। एसकेएमसीएच में पिछले कुछ दिनों से वैरिकोज वेन्स और नसों से जुड़ी अन्य समस्याओं के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के न्यूरो सर्जरी विभाग में ऐसे मरीजों की बढ़ती संख्या ने चिकित्सकों का भी ध्यान खींचा है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अमरनाथ राय के अनुसार लोगों की बदलती जीवनशैली नस संबंधी परेशानियों का एक महत्वपूर्ण कारण बन रही है। काम करने का बदला तरीका, खान-पान की गड़बड़ी और लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली से समस्या बढ़ सकती है।
डॉ. राय बताते हैं कि वैरिकोज वेन्स की स्थिति में नसों की दीवारें और उनके वाल्व कमजोर हो जाते हैं। इससे खून का प्रवाह हृदय की ओर सामान्य तरीके से नहीं हो पाता और रक्त नसों में जमा होने लगता है। इसके कारण नसें उभरी हुई या असामान्य दिखाई दे सकती हैं और मरीज को दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं।
लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहना या लगातार बैठे रहना इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। शरीर का वजन बढ़ने पर नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। परिवार में पहले किसी को इस तरह की समस्या रही हो तो खतरा अधिक हो सकता है। बढ़ती उम्र और शारीरिक निष्क्रियता भी जोखिम बढ़ाती है। डॉ. राय के अनुसार तंग कपड़े और लंबे समय तक हाई हील के जूते या सैंडल पहनने जैसी आदतों से भी परेशानी बढ़ सकती है। पोषण की कमी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
थोड़ी सक्रियता से नसों को मिलेगी राहत
नसों की समस्याओं से बचाव के लिए रोजमर्रा की आदतों में बदलाव महत्वपूर्ण है। डॉ. राय नियमित रूप से टहलने और व्यायाम करने की सलाह देते हैं। शरीर का वजन नियंत्रित रखना भी जरूरी है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर बैठने और खड़े होने की स्थिति बदलते रहना चाहिए।
पैरों में परेशानी होने पर आराम के समय उन्हें कुछ ऊंचाई पर रखने से लाभ मिल सकता है। सोते समय आवश्यकता के अनुसार पैरों के नीचे तकिया रखकर उन्हें थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है। हालांकि जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें ऐसे उपाय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करने चाहिए।
खान-पान पर भी देना होगा ध्यान
डॉ. राय के अनुसार भोजन में पर्याप्त फाइबर रखना और अधिक नमक से बचना लाभकारी है। कब्ज से बचने के लिए हरी सब्जियों और फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल किया जा सकता है। आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह से इसबगोल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके साथ शरीर को लंबे समय तक निष्क्रिय रखने से बचना जरूरी है। बहुत तंग कपड़ों और लगातार हाई हील पहनने से परहेज करने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों का जोर इस बात पर है कि नसों में लगातार दर्द, सूजन, त्वचा के रंग में बदलाव या असामान्य रूप से उभरी नसें दिखाई दें तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
