गांव से हर साल बाहर जा रहे 56.68 करोड़ रुपये को स्थानीय कारोबार में लगाने पर जोर
गणेश धर द्विवेदी। सदर ब्लाक के बढ़या बुजुर्ग गांव में गुरुवार को जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल और नेचरसोल फाउंडेशन के तत्वावधान में ‘संवाद-अभाव से अवसर की ओर’ कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें ग्रामीणों को गांव की आर्थिक क्षमता, स्थानीय बाजार और उद्यम की संभावनाओं से अवगत कराया गया। कार्यशाला में आत्मनिर्भर गांव बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने पर जोर दिया गया।
फैसिलिटेटर एवं लिपोक सोशल फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर सचिन गोरे ने बताया कि सर्वे के अनुसार बढ़या बुजुर्ग गांव से हर साल करीब 56.68 करोड़ रुपये विभिन्न उत्पादों की खरीदारी के लिए बाहर जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले 60 उत्पादों की सूची रखी और चर्चा की कि इनमें से किन वस्तुओं का उत्पादन गांव में ही किया जा सकता है। ग्रामीणों ने सरसों तेल, सूजी, मैदा, नमकीन और डिटर्जेंट सहित 24 उत्पादों को स्थानीय स्तर पर तैयार करने योग्य माना।जागृति के उद्यम कोर मार्कंडेय दयाल त्रिपाठी ने सर्वे के आंकड़ों और उनके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने आलू का उदाहरण देते हुए बताया कि किसान से 10 रुपये प्रति किलो खरीदा गया आलू बाहर का कारोबारी चिप्स बनाकर 200 से 300 रुपये प्रति किलो तक बेचता है। उन्होंने ग्रामीणों से स्थानीय उत्पादों में मूल्यवर्धन कर उद्यम खड़ा करने की संभावनाओं पर विचार करने का आह्वान किया।
जागृति बायोरिजनल सीओई के ऑपरेशंस मैनेजर आनंद सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला केवल एक दिन की गतिविधि नहीं है। जागृति एक वर्ष तक ग्रामीणों के साथ काम करेगी और कार्यशाला में सामने आई उद्यम संभावनाओं को धरातल पर उतारने में सहयोग करेगी।
इस अवसर पर नेचरसोल फाउंडेशन के संस्थापक विजय मणि, जागृति के ऑपरेशंस एसोसिएट मनोज तिवारी, राहुल रंजन, कंसल्टेंट हंसिका सिंह, सोक्रेट्स संस्था के रोहित सहित अन्य लोग मौजूद रहे
