जल-जीवन-हरियाली दिवस पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा-सार्वजनिक जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराना प्राथमिकता
पटना। बिहार में तालाब, पोखर, आहर और पईन जैसी सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तेज की जाएगी। इनकी पहचान राजस्व अभिलेखों के आधार पर कर अतिक्रमण हटाया जाएगा। अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अलग प्रकोष्ठ भी बनाएगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से मंगलवार को राजस्व सर्वे (प्रशिक्षण) संस्थान, शास्त्रीनगर में आयोजित जल-जीवन-हरियाली दिवस कार्यक्रम में मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इसे विभाग की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जल स्रोतों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण गंभीर विषय है और चिह्नित मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि तालाब, पोखर, आहर और पईन पर्यावरण संरक्षण के साथ भूजल स्तर बनाए रखने और आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन जल संरचनाओं को बचाना जरूरी है। उन्होंने अभियान से जुड़े सभी 15 विभागों के कामकाज को और प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों से सुझाव भी लिए।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चर्चा करते हुए जायसवाल ने कहा कि उनकी सोच से जल-जीवन-हरियाली अभियान धरातल पर उतरा और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हरित पट्टी बढ़ाने और जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में काम हुआ है। अब इस अभियान को आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त कराने की निगरानी के लिए अलग प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। यह प्रकोष्ठ जल संरचनाओं की पहचान से लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की निगरानी करेगा। विभागीय स्तर पर तालाब, पोखर, आहर और पईन सहित अन्य सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं के संरक्षण के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जल निकाय केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित रखना और अवैध कब्जे से मुक्त कराना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अभियान से जुड़े विभागों के अधिकारियों से गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम करने को कहा।
कार्यक्रम में सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान राजस्व अभिलेखों के आधार पर जल निकायों की पहचान करने और अतिक्रमण के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर सचिव सीमा त्रिपाठी, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत, जल-जीवन-हरियाली के मिशन निदेशक सुमित कुमार, उप मिशन निदेशक राम कुमार पोद्दार, संयुक्त सचिव डॉ. सुनील कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी नवाजिश अख्तर, सहायक निदेशक सुबोध कुमार, सहायक निदेशक-सह-जनसंपर्क पदाधिकारी जूही कुमारी, कार्यक्रम प्रबंधक सोनम कुमारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी पल्लवी और प्रशाखा पदाधिकारी शशि शेखर समेत अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।