सितंबर 2026 से नई सुविधा शुरू होने की संभावना, क्लेम सेटलमेंट को तेज बनाने पर ईपीएफओ का जोर

नई दिल्ली : पीएफ खाते में जमा पैसा जरूरत के वक्त निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया और भुगतान का इंतजार आने वाले समय में काफी कम हो सकता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO पीएफ निकासी को डिजिटल बैंकिंग की तरह आसान और तेज बनाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र सदस्य BHIM-UPI के जरिए क्लेम से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे और मंजूर रकम UPI से जुड़े बैंक खाते में तेजी से प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अनुसार यह सुविधा सितंबर से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इसकी निश्चित शुरुआत की तारीख को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नई व्यवस्था को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि UPI जुड़ने का मतलब पीएफ निकासी के नियमों में छूट मिलना नहीं है। सदस्य को पहले की तरह EPFO की निर्धारित पात्रता और शर्तें पूरी करनी होंगी। बदलाव मुख्य रूप से क्लेम और भुगतान की प्रक्रिया को सरल तथा तेज बनाने के लिए किया जा रहा है।

अभी EPF सदस्य को पैसा निकालने के लिए ऑनलाइन क्लेम दाखिल करना होता है। इसके बाद EPFO क्लेम की जांच करता है और मंजूरी मिलने पर पैसा सदस्य के रजिस्टर्ड बैंक खाते में भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में समय लग सकता है। प्रस्तावित UPI आधारित व्यवस्था का उद्देश्य क्लेम सेटलमेंट और मंजूर रकम को सदस्य तक पहुंचाने में लगने वाले समय को कम करना है।

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए सदस्य का UAN सक्रिय होना जरूरी होगा। आधार, पैन और बैंक खाते से संबंधित KYC भी सही और अपडेट होनी चाहिए। जिस बैंक खाते में पैसा प्राप्त करना है, उसका UPI से जुड़ा होना आवश्यक होगा। सदस्य निर्धारित माध्यम से क्लेम करेगा और EPFO पात्रता तथा जरूरी विवरण की जांच करेगा। मंजूरी मिलने के बाद रकम UPI से जुड़े बैंक खाते में भेजी जा सकेगी।

EPFO के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, BHIM-UPI आधारित रियल-टाइम क्लेम सेटलमेंट व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। शुरुआती व्यवस्था में Form 19 के तहत फाइनल पीएफ सेटलमेंट, Form 31 के तहत एडवांस और Form 10C के तहत पेंशन निकासी लाभ को शामिल करने का प्रस्ताव है। आधिकारिक दस्तावेज में इस व्यवस्था के लिए प्रति ट्रांजैक्शन एक लाख रुपये तक की सीमा का भी उल्लेख किया गया है।

UPI सुविधा आने के बाद पीएफ से कितनी रकम निकाली जा सकेगी, इसे लेकर भी भ्रम नहीं होना चाहिए। कोई सदस्य कितनी रकम निकाल सकता है, यह उसके क्लेम के प्रकार, पात्रता और उस समय लागू EPFO नियमों पर निर्भर करेगा। यानी UPI व्यवस्था का उद्देश्य निकासी की मौजूदा सीमा को बढ़ाना नहीं, बल्कि पात्र क्लेम के निपटारे और भुगतान को तेज करना है।

पूरा पीएफ बैलेंस भी केवल UPI सुविधा उपलब्ध हो जाने से नहीं निकाला जा सकेगा। नौकरी छोड़ने और सेवानिवृत्ति जैसी परिस्थितियों में निर्धारित नियमों के अनुसार फाइनल सेटलमेंट किया जा सकता है। वहीं मेडिकल जरूरत, मकान खरीदने या उससे जुड़ी निर्धारित जरूरतों, बच्चों की उच्च शिक्षा और शादी जैसे उद्देश्यों के लिए नियमों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा उपलब्ध है।

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू ऑटो-सेटलमेंट भी है। EPFO पहले से कुछ श्रेणियों में ऑटो-सेटलमेंट का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे पात्र क्लेम को तेजी से निपटाया जा सके। इसके साथ UPI आधारित भुगतान व्यवस्था जुड़ने पर मंजूर क्लेम की रकम सदस्य के बैंक खाते तक पहुंचने में लगने वाला समय और कम हो सकता है।

हालांकि इसका यह अर्थ नहीं होगा कि क्लेम करते ही हर सदस्य के खाते में तत्काल पैसा आ जाएगा। क्लेम की पात्रता, उपलब्ध विवरण, जरूरी सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी रहेगी। जिस क्लेम में अतिरिक्त जांच की जरूरत होगी, उसमें समय लग सकता है। नई व्यवस्था मुख्य रूप से पात्र और मंजूर क्लेम को तेजी से निपटाने तथा भुगतान को आसान बनाने के लिए तैयार की जा रही है।

शुरुआती दौर में सरकारी डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म BHIM पर फोकस किया जा रहा है। भविष्य में Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे अन्य UPI ऐप को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। 

नई व्यवस्था लागू होने से करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को फायदा मिल सकता है। मंजूर क्लेम की रकम तेजी से बैंक खाते में पहुंच सकेगी, भुगतान की प्रक्रिया अधिक डिजिटल होगी और पीएफ कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही क्लेम और भुगतान की स्थिति को समझना आसान होने से प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ सकती है।