चिकित्सकों को इलाज से पहले दोबारा जांच कराने की सलाह देनी पड़ रही, लगातार सामने आ रहे मामलों ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
स्टेट ब्यूरो, बिहार
मुजफ्फरपुर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच में मरीजों की जांच रिपोर्ट को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को उनकी बीमारी से ज्यादा चिंता अब रिपोर्ट की शुद्धता को लेकर सताने लगी है। पैथोलॉजी विभाग से मिल रही रिपोर्ट में नाम, लिंग और रजिस्ट्रेशन नंबर तक में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में इन दिनों रिपोर्टिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई मामलों में पुरुष मरीज को महिला के नाम की रिपोर्ट दे दी जा रही है, तो कहीं नाम सही है लेकिन रजिस्ट्रेशन नंबर गलत अंकित है। ऐसी गड़बड़ियों के कारण मरीज और उनके परिजन असमंजस में पड़ जाते हैं, वहीं चिकित्सकों को भी रिपोर्ट पर भरोसा करने में कठिनाई हो रही है। कई बार डॉक्टर मरीजों को दोबारा जांच कराने की सलाह देने को मजबूर हो रहे हैं।
इसी तरह का एक मामला शहर के समाजसेवी और जनप्रतिनिधि विनोद महासेठ के साथ भी सामने आया। उन्होंने 20 अप्रैल को एलएफटी, आरबीएस, केएफटी समेत अन्य जांच के लिए ब्लड सैंपल दिया था। जब वे शुक्रवार को रिपोर्ट लेने पहुंचे, तो उन्हें सुनीता देवी के नाम से रिपोर्ट थमा दी गई, जबकि उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर उनका ही दर्ज था। रिपोर्ट लेकर जब वे डॉक्टर के पास पहुंचे, तो डॉक्टर भी यह देख हैरान रह गए और बिना जोखिम लिए उन्हें दोबारा जांच कराने की सलाह दी।
इसके बाद महासेठ लैब पहुंचे, जहां कर्मियों ने रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर रिपोर्ट को सही बताया। लेकिन जब उन्होंने इस मामले की शिकायत अस्पताल अधीक्षक डॉ महेश प्रसाद से की, तो अधीक्षक ने तुरंत एक कर्मी को साथ भेजकर जांच कराई। इसके बाद उसी रिपोर्ट में नाम सुधार कर उन्हें दोबारा सौंप दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह कोई एकल मामला नहीं है। पिछले दो महीनों से पैथोलॉजी विभाग की कार्यप्रणाली में लगातार गिरावट देखी जा रही है। अस्पताल में कार्यरत एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इन दिनों रिपोर्ट में गड़बड़ी इतनी बढ़ गई है कि डॉक्टर भी उसके आधार पर दवा लिखने से पहले दो बार सोचने को मजबूर हैं। उन्होंने आशंका जताई कि या तो स्टाफ की कमी है या अनुभवहीन कर्मियों के कारण ऐसी लापरवाही हो रही है।
हालांकि कारण जो भी हो, इसका सबसे बड़ा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। गलत रिपोर्ट न केवल इलाज में देरी कर रही है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है। ऐसे में अब जरूरत है कि अस्पताल प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों का भरोसा बहाल हो सके।
