•  मिलिट्री इंटेलिजेंस और एसटीएफ के ज्वाइंट ऑपरेशन में मिली बड़ी सफलता। भारत, नेपाल और बांग्लादेश तक फैले नकली नोट सिंडिकेट के कई बड़े राज खुलने की उम्मीद


पूर्वी चम्पारण : भारत-नेपाल सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय जाली नोट गिरोह के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। मिलिट्री इंटेलिजेंस और बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने संयुक्त गुप्त अभियान चलाकर जाली नोटों के बड़े तस्कर दयाशंकर तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। पकड़ा गया आरोपी मूल रूप से सीतामढ़ी जिले का रहने वाला बताया गया है, जो लंबे समय से मोतिहारी और सीमावर्ती क्षेत्रों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाकर देश विरोधी नेटवर्क संचालित कर रहा था।


पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि दयाशंकर तिवारी हरैया थाना में दर्ज जाली नोट तस्करी मामले का मुख्य आरोपी और मोस्ट वांटेड अपराधी था। हरैया थाना कांड संख्या 23/26 में उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। कई बार दबिश देने के बावजूद वह फरार होने में सफल हो जाता था, लेकिन इस बार मिलिट्री इंटेलिजेंस और एसटीएफ द्वारा बिछाए गए जाल में वह बच नहीं सका।


पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मेजरगंज थाना में उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, नकली नोट कारोबार और आर्म्स एक्ट से जुड़े केस दर्ज बताए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक उसका आपराधिक नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा था और सीमा पार से संचालित गतिविधियों में उसकी भूमिका बेहद सक्रिय थी।


प्राथमिक जांच में जो बातें सामने आई हैं, उससे पता चलता है कि दयाशंकर तिवारी केवल नकली नोटों की सप्लाई करने वाला साधारण तस्कर नहीं था। वह नकली भारतीय और नेपाली मुद्रा की छपाई से लेकर उसके वितरण तक पूरे सिंडिकेट का संचालन करता था। उसका नेटवर्क भारत और नेपाल की सीमाओं को पार कर बांग्लादेश तक फैला हुआ था। इन तीनों देशों में उसके गुर्गे और संपर्क सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो बाजार में नकली नोटों को खपाने का काम करते थे।


सूत्रों के अनुसार इस गिरफ्तारी के पीछे मिलिट्री इंटेलिजेंस का बेहद सटीक और पुख्ता इनपुट था। सैन्य खुफिया एजेंसियों को सीमा पार से संचालित संदिग्ध गतिविधियों और जाली नोटों के इस बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली थी। इसी दौरान दयाशंकर तिवारी की मोतिहारी और सीमावर्ती इलाकों में मौजूदगी की सूचना मिलने पर एसटीएफ के साथ संयुक्त रणनीति बनाई गई और गुप्त छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।


सुरक्षा एजेंसियां अब आरोपी से बेहद गोपनीय तरीके से पूछताछ कर रही हैं। माना जा रहा है कि उसकी निशानदेही पर सीमावर्ती जिलों के अलावा अन्य राज्यों में भी छापेमारी हो सकती है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस पूछताछ में कई सफेदपोशों, बड़े तस्करों और विदेशी हैंडलर्स के नाम सामने आ सकते हैं, जो लंबे समय से इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।


अधिकारियों का मानना है कि दयाशंकर तिवारी की गिरफ्तारी भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय जाली नोट सिंडिकेट के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। इससे नकली मुद्रा के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।