किडनी रैकेट : 10 लाख में खरीदी किडनी, 90 लाख में बेची, मानवता को शर्मसार करने वाली घटना

कौस्तुभ कुमार मलयज

यूपी के कानपुर में किडनी रैकेट के खुलासे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। इंसानी मजबूरी को बाजार बनाकर करोड़ों का खेल खेला जा रहा था। क्राइम ब्रांच और पुलिस अब इस काले धंधे की जड़ों तक पहुंचने में जुट गई है। इस मामले में हिरासत में लिये गये संदेही गुनहगार शिवम अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ हुई। पूछताछ में उसने बताया कि किस तरह गरीब लोगों की मजबूरी को ढाल बनाकर किडनी खरीद-बिक्री का पूरा नेटवर्क चलाया जाता था।

उसने पुलिस को बताया कि शक से बचने के लिये किडनी देने वाले को मरीज का रिश्तेदार बताया जाता था। उसे गरीब और परिवार का इकलौता सहारा बताकर कम कीमत में सौदा तय कराया जाता था। दूसरी ओर मरीज के परिजनों को उसकी बिगड़ती हालत का हवाला देकर जल्द किडनी का इंतजाम करने का दबाव बनाया जाता था।फिर उनकी आर्थिक स्थिति भांपकर उसी किडनी को कई गुना मुनाफे में बेच दिया जाता था।

पुलिस जांच में सामने आया कि उत्तराखंड के एक युवक से करीब 10 लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा हुआ। दलाल ने उसे सिर्फ 9.5 लाख रुपये दिये, जिसमें 6 लाख नकद और 3.5 लाख रुपये का चेक शामिल था। बाद में उसी किडनी को मुजफ्फरनगर की एक महिला मरीज के परिजनों को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया गया।

50 हजार के विवाद से खुला राज

सौदे के बाद बचे 50 हजार रुपये न मिलने पर डोनर ने पुलिस से शिकायत कर दी। इसी शिकायत ने किडनी रैकेट के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। जांच शुरू हुई तो अस्पतालों, दलालों और डॉक्टरों की मिलीभगत की परतें खुलती चली गईं। पुलिस अब उन अस्पतालों की पड़ताल कर रही है जहां ट्रांसप्लांट या इलाज के नाम पर यह खेल चलता था। जांच में सामने आया है कि शहर के कई इलाकों में ऐसे अस्पताल सक्रिय थे, जिनमें बर्रा, नौबस्ता, पनकी, कल्याणपुर शामिल हैं। इन अस्पतालों में मरीजों को गाल ब्लैडर, पथरी या आंतों की बीमारी बताकर भर्ती किया जाता था, ताकि किडनी ट्रांसप्लांट का शक न हो।

दिल्ली मुंबई और लखनऊ से बुलाये जाते थे डॉक्टर

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि ट्रांसप्लांट के लिये दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाये जाते थे। टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजिस्ट, ग्राफ्टिंग एक्सपर्ट, एनेस्थेटिस्ट और डायटीशियन शामिल होते थे। 

बीती रात पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने तीन अस्पतालों में प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर कल्याणपुर, आहूजा हॉस्पिटल केशवपुरम रोड एवं मेडलाइफ हॉस्पिटल पनकी-कल्याणपुर रोड में छापा मारा। यहां भर्ती किडनी मरीजों और रिकॉर्ड की जांच की गई।

खबर है कि पुलिस को आवास विकास स्थित आरोही हॉस्पिटल में किडनी डोनर भर्ती मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्पताल करीब दो महीने पहले ही बंद हो चुका था। इस मामले में पुलिस ने दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस की टीमें पश्चिम बंगाल और हरियाणा तक भी जांच के लिए पहुंची हैं। आशंका है कि इन राज्यों से भी युवकों की किडनी खरीदकर इस रैकेट में इस्तेमाल की गई।