अंधविश्वास में मां ने तांत्रिक के साथ मिलकर दी अपनी ही मासूम बेटी की नरबलि, बीजेपी नेता समेत तीन गिरफ्तार
कौस्तुभ कुमार मलयज
झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ से एक ऐसी सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। अंधविश्वास के अंधेपन में एक मां ने ही अपनी 13 वर्षीय मासूम बेटी की बलि चढ़ा दी। पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करते हुए बीजेपी नेता भीम राम, मृतिका की मां रेशमी देवी और एक कथित तांत्रिक शांति देवी को गिरफ्तार किया है।
जाने क्या है पूरा मामला
विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम कुसुम्भा में बीते 24/25 मार्च की रात एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई। रामनवमी के मंगला जुलूस की रात गायब हुई एक नाबालिग बच्ची का शव अगले दिन सुबह गांव के मिडिल स्कूल के पीछे झाड़ियों से बरामद हुआ। शुरुआत में यह मामला बलात्कार और हत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन जब पुलिस की विशेष जांच टीम ने जांच शुरू की, तो परत दर परत ऐसी सच्चाई सामने आई जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए।
साजिश के पीछे का खौफनाक कारण
पुलिस जांच और गिरफ्तार आरोपियों के कबूलनामे के अनुसार मृतिका की मां रेशमी देवी अपने बेटे सुधीर कुमार सिंह की मानसिक और शारीरिक बीमारी को लेकर काफी समय से परेशान थी, वह गांव की ही एक कथित तांत्रिक शान्ति देवी उर्फ भगतिनी के संपर्क में थी। भगतिनी ने रेशमी को विश्वास दिलाया कि उसके बेटे पर बुरा साया है और इसे ठीक करने के लिए एक कुंवारी 'कन्या’ की बलि देनी होगी। तांत्रिक ने कुटिल चाल चलते हुए रेशमी को भड़काया कि उसकी अपनी छोटी बेटी पर ही माता सवार रहती है, इसलिए उसकी बलि देना सबसे उत्तम होगा। अपने बेटे को ठीक करने के जुनून में अंधी हुई मां अपनी ही बेटी के खून की प्यासी बन गई।
हत्याकांड का घटनाक्रम कैसे दी गई वारदात को अंजाम ?
नक्षत्रों का खेल 24 मार्च की रात करीब 9:30 बजे, तांत्रिक के कहे अनुसार रेशमी देवी अपनी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। वहां उनके साथ गांव का ही बीजेपी नेता भीम राम भी मौजूद था।
तांत्रिक अनुष्ठान
सबसे पहले मनसा मंदिर में बच्ची की पूजा की गई, उसे सिंदूर-काजल लगाया गया और इलायची दाना खिलाया गया। इसके बाद तांत्रिक उन्हें घर के पीछे ‘बांसवाड़ी’ बांस के झुरमुट में ले गई। वहां जमीन पर प्लास्टिक बिछाकर बच्ची को लिटाया गया। जैसे ही तांत्रिक ने ‘देवास’ कथित दैवीय शक्ति आने का ढोंग किया और खून की मांग की, भीम राम ने बच्ची का गला घोंटना शुरू कर दिया। इस दौरान सगी मां ने अपनी ही बेटी के दोनों पैर मजबूती से पकड़ रखे थे ताकि वह छटपटा न सके।
क्रूरता की हदें
बच्ची की मौत होने के बाद तंत्र-मंत्र के नाम पर शव के साथ बर्बरता की गई। तांत्रिक के इशारे पर मां ने ही मृत बेटी के कपड़े नीचे किए और तांत्रिक ने उसके निजी अंगों पर चोट पहुंचाई। भीम राम ने पत्थर से मारकर बच्ची का सिर फोड़ दिया, ताकि खून निकल सके, जिसे तांत्रिक ने पूजा स्थल पर छिड़का।