- रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार, EMI में नहीं आएगा कोई बदलाव
नई दिल्ली : घर, कार या अन्य किसी प्रकार के लोन की ईएमआई चुका रहे करोड़ों लोगों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने प्रमुख नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है। इसके साथ ही लोन लेने वाले ग्राहकों की मासिक किस्तों में तत्काल किसी तरह का बदलाव होने की संभावना नहीं है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखना उचित समझा गया है। लगातार चौथी समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को पुराने स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया है।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने होम लोन, वाहन ऋण या अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज ले रखे हैं। ब्याज दर स्थिर रहने से उनकी ईएमआई भी मौजूदा स्तर पर बनी रहेगी। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस समय महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक गतिविधियों को संतुलित गति देने के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोई बड़ा फैसला ले सकता है। हालांकि आरबीआई ने दरों में बदलाव की बजाय स्थिरता को प्राथमिकता दी।
गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक ने पिछली बार अक्टूबर 2025 में रेपो रेट में कटौती की थी। इसके बाद दिसंबर 2025, फरवरी 2026, अप्रैल 2026 और अब जून 2026 की समीक्षा बैठकों में ब्याज दरों को यथावत रखा गया है। वर्ष 2025 के दौरान आरबीआई ने कई चरणों में कुल 125 आधार अंक यानी 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी, जिससे लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिली थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिमों को देखते हुए आरबीआई फिलहाल किसी जल्दबाजी में नहीं दिखना चाहता। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखने का फैसला किया है।
दरअसल, रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अल्पकालिक जरूरतों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से धन उधार लेते हैं। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है और इसका असर ग्राहकों को मिलने वाले लोन की ब्याज दरों पर पड़ता है। वहीं रेपो रेट घटने पर आमतौर पर कर्ज सस्ता होता है और ईएमआई में राहत मिलती है।