नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने विकास, उपलब्धियों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों का व्यापक खाका रखा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मानसून की तरह संसद का मानसून सत्र भी देशहित में अत्यंत उत्पादक साबित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद में सार्थक चर्चा, तथ्यों पर आधारित बहस और सभी दलों का सहयोग ही भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार सक्रिय मानसून देश के लिए समृद्धि लेकर आता है, उसी प्रकार एक उत्पादक मानसून सत्र भी राष्ट्र के विकास को नई गति देता है। उन्होंने कहा कि देश की जनता और विशेष रूप से युवा चाहते हैं कि संसद सुचारु रूप से चले, महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हो और विकास से जुड़े फैसले तेजी से आगे बढ़ें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने में भारत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा किया है। उन्होंने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में स्काईरूट स्टार्टअप की ऐतिहासिक सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि महज 28 वर्ष की औसत आयु वाली टीम ने भारत को निजी अंतरिक्ष अन्वेषण के नए दौर में पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरिक्ष में भारत का परचम और मजबूत किया है तथा यह उनकी असीमित क्षमता और आत्मविश्वास का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में ऐसा माहौल बना है, जहां युवा बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार भी कर रहे हैं। उन्होंने इसका श्रेय सरकार द्वारा किए गए सुधारों और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों को दिया। उनके अनुसार यही कारण है कि भारतीय स्टार्टअप और युवा उद्यमी वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं।

उन्होंने हाल के दिनों में देश में शुरू हुई कई बड़ी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। राजस्थान में नई तेल रिफाइनरी, देश के तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र और दुनिया की सबसे लंबी तथा सबसे शक्तिशाली हरित हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत को उन्होंने भारत की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों का समर्पण और अथक परिश्रम है।

प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और रसायनों की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ने के बावजूद भारत मजबूती से आगे बढ़ता रहा। उन्होंने कहा कि सभी वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और 7.7 प्रतिशत की विकास दर देश की आर्थिक मजबूती तथा दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे संसद को स्वस्थ लोकतांत्रिक विमर्श का मंच बनाएं। उन्होंने कहा कि संसद में तथ्यों और तर्कों के आधार पर गंभीर तथा रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि व्यवधानों से किसी का भला नहीं होता। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी दल राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संसद के इस मानसून सत्र को ऐतिहासिक और परिणामकारी बनाएंगे।