- बदलती जीवनशैली और तनाव के बीच आयुर्वेद बना राहत का सहारा, त्रिदोष संतुलन को स्वस्थ जीवन का सबसे बड़ा आधार मानती है यह पद्धति
मुजफ्फरपुर : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, अनियमित खानपान और बदलती जीवनशैली लोगों को धीरे-धीरे बीमारियों की ओर धकेल रही है। ऐसे दौर में लोग एक बार फिर प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। सदियों पुरानी आयुर्वेद पद्धति न सिर्फ बीमारियों के इलाज का दावा करती है, बल्कि शरीर और मन को संतुलित रखकर स्वस्थ जीवन जीने की राह भी दिखाती है।
जनक आयुर्वेद अनुसंधान केन्द्र एवं बाबा गरीब नाथ हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ ललन तिवारी वैध जी बताते हैं कि आयुर्वेद लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी चिकित्सा पद्धति है, जिसका उद्देश्य केवल रोग का इलाज करना नहीं बल्कि व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखना है। उनके अनुसार आयुर्वेद हमारी आधुनिक जीवनशैली को संतुलित दिशा देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में जड़ी बूटियों और प्राकृतिक तत्वों से दवाएं, औषधियां और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
इनका सही तरीके से उपयोग करने पर व्यक्ति तनावमुक्त, ऊर्जावान और रोगमुक्त जीवन जी सकता है। आयुर्वेद केवल घरेलू नुस्खों या तेल मालिश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान पर आधारित चिकित्सा प्रणाली है।
डॉ तिवारी के अनुसार आयुर्वेद का सबसे महत्वपूर्ण आधार त्रिदोष सिद्धांत है। वात, पित्त और कफ शरीर के तीन प्रमुख दोष माने गए हैं, जो शरीर की पूरी कार्यप्रणाली को नियंत्रित करते हैं। जब ये तीनों संतुलित अवस्था में रहते हैं, तब व्यक्ति स्वस्थ रहता है, लेकिन इनमें असंतुलन आने पर विभिन्न प्रकार की बीमारियां जन्म लेने लगती हैं।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार प्रकृति पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बनी है। यही पांच तत्व मिलकर शरीर के त्रिदोष का निर्माण करते हैं। वात वायु और आकाश तत्व से बना है, पित्त अग्नि और जल से निर्मित होता है, जबकि कफ पृथ्वी और जल तत्व का मिश्रण माना जाता है। शरीर में इन तत्वों और दोषों का संतुलन बनाए रखना ही स्वस्थ जीवन का मूल आधार है।
डॉ तिवारी का कहना है कि आयुर्वेद में आहार, दिनचर्या, योग, ध्यान और व्यायाम को विशेष महत्व दिया गया है। यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित रखे, तो वह कई गंभीर बीमारियों से खुद को बचा सकता है। आयुर्वेद बीमारी के लक्षणों को दबाने के बजाय उसके मूल कारण को पहचानकर उपचार करने पर जोर देता है। यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भरोसा कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उनके केंद्र में विभिन्न प्रकार की बीमारियों से पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और अधिकतर लोगों को आयुर्वेदिक उपचार से लाभ मिलता है। उनके अनुसार आयुर्वेद शरीर, त्वचा, बाल और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी बेहद प्रभावी भूमिका निभाता है।
