चुनावी माहौल के बीच पश्चिम बंगाल में तेज हुई राजनीतिक सरगर्मी
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झाड़ग्राम में अपनी एक और बड़ी रैली को संबोधित करते हुए राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए। अपने भाषण में उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और आरोप लगाया कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने के प्रयासों में बाधा खड़ी की गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने इस दिशा में सहयोग करने के बजाय विरोध का रास्ता चुना। उन्होंने बंगाल की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह समझना होगा कि कौन उनके अधिकारों के साथ खड़ा है और कौन उनके रास्ते में रुकावट बन रहा है।
रैली के दौरान पीएम मोदी ने राज्य में कथित सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार को भी मुद्दा बनाया। खासकर आदिवासी बहुल इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों से इन क्षेत्रों के विकास की अनदेखी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद लोगों को बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाईं। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी मूलभूत जरूरतों की कमी को लेकर सरकार को घेरा।
प्रधानमंत्री ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि कई इलाकों में लोग अनियमित आपूर्ति से परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां आम जनता अंधेरे में जीवन बिता रही है, वहीं सत्ता से जुड़े लोगों की सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं।
अपने राजनीतिक भाषण के बीच प्रधानमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। रैली के बाद उन्होंने अपने काफिले को रोककर एक स्थानीय झालमुरी विक्रेता के पास जाकर न सिर्फ खुद झालमुरी खरीदी, बल्कि आसपास मौजूद बच्चों के साथ भी साझा की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय महिलाओं से बातचीत की और लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। इस सहज और मानवीय क्षण की तस्वीरें भी सामने आईं, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनीं।
झाड़ग्राम की इस रैली ने साफ संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला अब और अधिक तीखा होने वाला है, जहां विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय मुद्दे प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बनते जा रहे हैं।