राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश को भविष्य का बड़ा डिफेंस और ड्रोन हब बनाने का विजन भी देश के सामने रखा
विशाखापत्तनम : हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना को एक और अत्याधुनिक युद्धपोत मिल गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में एडवांस्ड स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट 'INS महेंद्रगिरी' (F-38) को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया। कमीशनिंग समारोह के दौरान रक्षा मंत्री को नेवल डॉकयार्ड में 'गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया गया।
INS महेंद्रगिरी की कमीशनिंग ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका-ईरान संघर्ष और लाल सागर के मौजूदा हालात ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हिंद महासागर में भी रणनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। ऐसे माहौल में आधुनिक युद्धपोत पर तिरंगे का फहराना भारतीय नौसेना की बढ़ती युद्ध क्षमता के साथ रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की मजबूत होती तस्वीर भी पेश करता है।

INS महेंद्रगिरी के नौसेना में शामिल होने के साथ पिछले एक वर्ष के दौरान कमीशन किए गए युद्धपोतों की संख्या 18 के पार पहुंच गई है। नौसेना की क्षमता बढ़ाने की रफ्तार यहीं रुकने वाली नहीं है। वर्ष 2026 के अंत तक लगभग इतने ही और जहाजों को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल करने की तैयारी है।
INS महेंद्रगिरी का नाम ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के पास पूर्वी घाट में स्थित महेंद्रगिरी पर्वत शृंखला से लिया गया है। यह पर्वत शृंखला शक्ति, दृढ़ता और भारतीय विरासत का प्रतीक मानी जाती है।
प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित INS महेंद्रगिरी 'नीलगिरी-क्लास' का स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। युद्धपोत का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है।
इस फ्रिगेट की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी स्वदेशी हिस्सेदारी है। युद्धपोत में 75 फीसदी से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने की भारत की कोशिशों के लिहाज से इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
INS महेंद्रगिरी को भविष्य के आधुनिक नौसैनिक युद्ध और लंबी दूरी के समुद्री अभियानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी मल्टी-मिशन क्षमता इसे एक साथ अलग-अलग तरह के खतरों से मुकाबला करने में सक्षम बनाती है।
युद्धपोत एंटी-एयर ऑपरेशन के जरिए हवाई हमलों का मुकाबला कर सकता है। एंटी-सरफेस क्षमता समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई में मदद करेगी, जबकि एंटी-सबमरीन सिस्टम समुद्र की गहराइयों में छिपी पनडुब्बियों को खोजने और उनसे मुकाबला करने में सक्षम है।
महेंद्रगिरी का विशेष स्टील्थ डिजाइन दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान को मुश्किल बनाता है। युद्ध के दौरान यही खूबी भारतीय नौसेना को महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त दे सकती है।
यह युद्धपोत आधुनिक सरफेस-टू-सरफेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम से लैस है। इसके साथ एडवांस्ड रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम इसकी युद्ध क्षमता को और घातक बनाते हैं।
महेंद्रगिरी की भूमिका केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहेगी। लंबी दूरी की समुद्री निगरानी, समुद्री सुरक्षा और संकट के समय मानवीय सहायता एवं आपदा राहत यानी HADR अभियानों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों के बीच INS महेंद्रगिरी का नौसेना के बेड़े में शामिल होना भारत की समुद्री ताकत में अहम बढ़ोतरी है। इसे चीन सहित क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों को चुनौती देने वाली ताकतों के लिए भी एक मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
INS महेंद्रगिरी की कमीशनिंग के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के औद्योगिक और सामरिक भविष्य को लेकर भी बड़ा विजन पेश किया। विशाखापत्तनम नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख 'डिफेंस और ड्रोन हब' के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।
रक्षा मंत्री ने राज्य की क्षमताओं की सराहना करते हुए कुरनूल में प्रस्तावित 'ड्रोन सिटी' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आठ प्रमुख ड्रोन कंपनियों का एक समूह कुरनूल में ड्रोन सिटी स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह सूरत को दुनिया की 'डायमंड सिटी' और बेंगलुरु को भारत की 'सिलिकॉन वैली' के रूप में जाना जाता है, उसी तरह आने वाले समय में इस क्षेत्र को देश के 'ड्रोन हब' के तौर पर वैश्विक पहचान मिल सकती है।
रक्षा मंत्री ने आंध्र प्रदेश के रक्षा क्षेत्र में योगदान को अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों से जोड़ते हुए इसकी व्यापक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के जरिए भारत की हवाई ताकत को मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है।
समुद्र की गहराइयों में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के नेवल सिस्टम और टॉरपीडो भारतीय रक्षा क्षमताओं को मजबूती दे रहे हैं। वहीं कुरनूल में विकसित होने वाली आधुनिक ड्रोन तकनीक देश की खुफिया, निगरानी और मानव रहित प्रणालियों की क्षमता को नई ऊंचाई देगी।
समुद्र की सतह पर अब INS महेंद्रगिरी भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है। आधुनिक हथियारों, स्टील्थ तकनीक और मल्टी-मिशन क्षमता से लैस यह फ्रिगेट लंबी दूरी के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इसका स्पष्ट अर्थ है कि आंध्र प्रदेश हवा, समुद्र की सतह, समुद्र की गहराई और मानव रहित तकनीक के क्षेत्र में भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में अहम योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आंध्र प्रदेश सरकार और राज्य की जनता को बधाई दी।
