इस बार कोलकाता करेगा राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी, ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ रखी गई है थीम
एनके मिश्रा, नई दिल्ली
तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ती मानसिक चुनौतियों और गैर-संचारी रोगों के दौर में योग केवल व्यायाम का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर जीवन का सूत्र बनकर उभरा है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज दुनिया के सबसे बड़े जनभागीदारी वाले आरोग्य आंदोलनों में शामिल हो चुका है। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 12वां आयोजन किया जाएगा, जिसकी राष्ट्रीय मेजबानी इस बार कोलकाता करेगा। इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ रखी गई है, जो लंबी उम्र के साथ-साथ स्वस्थ, सक्रिय और गुणवत्तापूर्ण जीवन पर बल देती है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। एक दशक से कुछ अधिक समय में यह आयोजन संयुक्तराष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त कार्यक्रम से आगे बढ़कर वैश्विक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। आज दुनिया के सैकड़ों देशों में लाखों लोग एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य, संतुलन और सामूहिक कल्याण का संदेश देते हैं। वर्ष 2026 का आयोजन भी इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए निवारक स्वास्थ्य सेवा और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में बुजुर्ग आबादी लगातार बढ़ रही है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां नई चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। ऐसे समय में केवल आयु बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ रहने की अवधि, शारीरिक क्षमता, मानसिक संतुलन और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी जरूरी है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम तय की गई है।
भारत और योग का संबंध हजारों वर्षों पुराना है। भारतीय ज्ञान परंपरा में योग को शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का माध्यम माना गया है। समय के साथ यह केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रभावी उपाय के रूप में स्थापित हुआ है। आज दुनिया के लगभग हर हिस्से में योग का अभ्यास किया जा रहा है।
संयुक्तराष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्तराष्ट्र महासभा के 69वें अधिवेशन में इसका प्रस्ताव रखा था, जिसे रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों का समर्थन मिला। इसके बाद 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। वर्ष 2016 में यूनेस्को ने योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल कर इसकी वैश्विक महत्ता को और मजबूत किया।
योग विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं में से एक माना जाता है। इसकी जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक पहुंचती हैं। संस्कृत शब्द ‘योग’ का अर्थ जोड़ना या एकीकृत करना है, जो शरीर और मन के सामंजस्य का प्रतीक है। वेदों, उपनिषदों, बौद्ध और जैन साहित्य के साथ-साथ महाभारत और रामायण में भी योग का उल्लेख मिलता है।
महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से योग को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया और इसकी दार्शनिक तथा व्यावहारिक संरचना को स्थापित किया। सदियों से ऋषियों, संतों और योग गुरुओं ने इस परंपरा को संरक्षित रखा और दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज योग केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य और मानव कल्याण का प्रतीक बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 12वां संस्करण इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए दुनिया को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
