होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई की चेतावनी से वैश्विक चिंता बढ़ी

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब खुले सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हमलों के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू करने का दावा किया, जिससे खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह अभियान ईरान की लगातार आक्रामक गतिविधियों के जवाब में चलाया गया। जानकारी के अनुसार यह सैन्य अभियान तेहरान में आधी रात के कुछ समय बाद शुरू हुआ और लगभग चार घंटे तक जारी रहा।

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरानी सेना ने जवाबी कार्रवाई के दौरान कुल 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इनमें कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस, अहमद अल-जाबेर एयर बेस तथा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस को प्रमुख रूप से निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।

ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि जंजन, तब्रीज और उर्मिया शहरों से जॉर्डन की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

तनाव बढ़ने के साथ ही बहरीन में मिसाइल हमले की आशंका को देखते हुए सायरन बजाकर चेतावनी जारी की गई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि सुरक्षा कारणों से कई बार अलर्ट जारी किया गया। वहीं कुवैत ने अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया। कुवैती सेना के अनुसार एयर डिफेंस सिस्टम संभावित दुश्मन हवाई लक्ष्यों पर निगरानी रख रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं।

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार देश के दक्षिणी हिस्सों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन में मौजूद अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट को भी ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया गया। इसके बाद क्षेत्र में तैनात अमेरिकी और सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियां और तेज हो गईं।

बढ़ते खतरे को देखते हुए कुवैत ने अपना एयरस्पेस बंद करने की घोषणा कर दी है। कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने कहा कि यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके चलते क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की है। यह वही जलमार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चे तेल और व्यापारिक सामान की आपूर्ति होती है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों सहित कोई भी पोत यदि इस मार्ग से गुजरने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ईरानी मीडिया ने दो जहाजों पर गोलीबारी की घटनाओं की भी पुष्टि की है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और गहरा गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, समुद्री व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।