- पूर्वी चंपारण की 396 पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए शवदाह गृह सवालों के घेरे में हैं, अब प्रशासन ने रिपोर्ट तलब कर दोषियों पर कार्रवाई का संकेत दिया है
नीरज कुमार, पूर्वी चंपारण : महात्मा गांधी की कर्मभूमि पूर्वी चंपारण से विकास योजनाओं की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो न केवल सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों को आईना भी दिखाती है। जिन मुक्तिधामों की परिकल्पना लोगों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने के लिए की गई थी, आज वही मुक्तिधाम खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहाते नजर आ रहे हैं। जहां लोगों को मोक्ष की राह मिलनी थी, वहां योजनाएं खुद मुक्ति मांगती दिखाई दे रही हैं।
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना के तहत जिले के सभी 27 प्रखंडों की 396 पंचायतों में शवदाह गृह और मुक्तिधाम का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार के लिए सम्मानजनक और व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। समाज की गिरती संवेदनशीलता और चंद रुपयों के लालच में डूबे निर्माण तंत्र ने इस पवित्र उद्देश्य को भी नहीं बख्शा।
जिले की अधिकांश पंचायतों में इन मुक्तिधामों पर चार लाख से लेकर दस लाख रुपये तक खर्च किए गए। कुल राशि करोड़ों रुपये में पहुंचती है। आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई। कई स्थानों पर घटिया ईंट, कमजोर लोहे और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि कहीं-कहीं बालू और सीमेंट की जगह मिट्टी जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद ढांचे टूटने और बिखरने लगे।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिले के कई मुक्तिधामों में आज तक एक भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। इससे पहले कि वहां किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा पूरी होती, कई स्थानों पर शवदाह गृह खुद ही जर्जर होकर धराशायी होने लगे। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि लोगों के अंतिम संस्कार से पहले ही इन मुक्तिधामों और सरकारी दावों का दाह संस्कार हो गया।
यदि जिले के विभिन्न पंचायतों में बने मुक्तिधामों का निरीक्षण किया जाए तो विकास कार्यों की भयावह तस्वीर साफ दिखाई देती है। टूटे हुए चबूतरे, झुकी हुई दीवारें, उखड़ती ईंटें और जर्जर शेड यह सवाल पूछते नजर आते हैं कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह स्थिति क्यों पैदा हुई। जहां इंसान को अंतिम शांति मिलनी थी, वह जगह आज खुद अपनी बदहाली पर रोती दिखाई देती है।
इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार ने जिला पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि जिले की सभी 396 पंचायतों में बने मुक्तिधामों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत और अद्यतन रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर समयसीमा तय करते हुए रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
डीडीसी ने दो टूक कहा है कि निर्माण कार्य की शुरुआत से लेकर गुणवत्ता तक हर स्तर की जांच होगी। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या निर्माण एजेंसी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उनके खिलाफ ऐसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी जो एक मिसाल बनेगी। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
