रजिस्ट्री के साथ ही शुरू होगा नामांतरण, हर संपत्ति को यूनिक प्रापर्टी आईडी और हर भूखंड को ‘भू-आधार’ नंबर दिया जाएगा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार भूमि और संपत्ति से जुड़ी व्यवस्थाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टांप एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का ऐसा खाका प्रस्तुत किया, जिसके लागू होने के बाद संपत्ति के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।
बैठक में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत अधिनियम में नई धारा 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़े जाने की तैयारी है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद किसी भी अचल संपत्ति के पंजीकरण से पहले उसके स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य होगी। इससे फर्जी दस्तावेजों, विवादित संपत्तियों और स्वामित्व संबंधी धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की संपत्तियों के लिए यूनिक प्रापर्टी आईडी विकसित करेगी। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से किसी भी संपत्ति की पहचान, मालिकाना हक, स्थिति और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। इससे नागरिकों, निवेशकों और सरकारी विभागों को सटीक एवं अद्यतन जानकारी प्राप्त होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से जारी है। वहीं शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रापर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सरकार का उद्देश्य राज्य की प्रत्येक संपत्ति को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए अलग से आवेदन करने या विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे सभी रिकॉर्ड एक साथ अपडेट होते रहेंगे।
भूमि प्रबंधन को और अधिक सटीक बनाने के लिए प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह विशेष पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने का आधार बनेगी। इससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक, प्रमाणिक और अद्यतन बने रहेंगे।
नई व्यवस्था के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को भी स्टांप एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रापर्टी आईडी आधारित यह प्रणाली विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि कर संग्रहण व्यवस्था भी अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सकेगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल एकीकरण और रिकॉर्ड के रियल-टाइम अपडेट से संपत्ति संबंधी विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी। स्वामित्व संबंधी अस्पष्टता दूर होगी, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। योगी सरकार की यह पहल डिजिटल गवर्नेंस को नई मजबूती देने के साथ-साथ प्रदेश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
